Daily 24 भारत डेस्क: नए साल की शुरुआत होते ही जहां पूरी दुनिया खुशियां मना रही थी. दूसरी तरफ अमेरिका वेनेजुएला पर हमले की तैयारी कर रहा था. जिसके चलते उसने बिना देरी किए वेनेजुएला पर बीते शनिवार को हमला बोल दिया. इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से वेनेजुएला को धमकियां दे रहे थे. जिसके बाद इन्होंने हमला करके वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन इसी बीच एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें रूस और अमेरिका के बीच इस एक्शन को लेने से पहले ही सौदा हो चुका है. यह रिपोर्ट फर्स्टपोस्ट ने शेयर की है, जिसके अनुसार ट्रंप प्रशासन की पूर्व शीर्ष अधिकारी रह चुकी फियोना हिल ने 2019 में बताया था कि रूस के राष्ट्रपति एक सौदा करना चाहते हैं, जोकि बेहद ही अजीबोगरीब है. जिसमें यूक्रेन और वेनेजुएला पर जिक्र किया गया था.
फियोना हिल रूस और यूरोप के मामलों की सीनियर डायरेक्टर और डिप्टी असिस्टेंट थीं. जिसके चलते वह 2017 से 2019 तक नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में थीं. उनके मुताबिक इस सौदे में बहुत सी गहरी बातें की गईं, जिसमें एक यह भी थी कि अमेरिका वेनेजुएला के साथ जो भी करना चाहता हो कर सकता है, लेकिन इसके बदले यूक्रेन के किसी मामले में रूस को पूरी छूट दे. हिल ने आगे बताया था कि यह जो प्रस्ताव रखा गया है, वह अमेरिका की पुरानी नीति पर टिका है, जिसका नाम है ‘मोनरो डॉक्ट्रिन’. इस नीति के अनुसार अमेरिका अपने इलाके में कोई भी हस्तक्षेप नहीं चाहता. जिसके बदले रूस की भी यह मांगे थीं कि अमेरिका रूस के इलाकों में यानि यूक्रेन और पूर्वी यूरोप में कोई दखल न दे.
हिल ने कहा कि मई 2019 के बीच रूस ने ट्रंप प्रशासन को संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका यदि रूस को अपने बैकयार्ड से दूर रखना चाहता है तो इसके बदले में अमेरिका को भी यही नीति अपनानी होगी. जिसमें अमेरिका भी रूस से दूर रहे. उन्होंने इस स्वैप का नाम वेनेजुएला-युक्रेन दिया. इस मामले को लेकर बहुत से दिलचस्प खुलासे हुए हैं. रूस ने इस दबाव को गहरा करने के लिए और समझौता न टूटे उसके लिए वेनेजुएला में मादुरो सरकार की सुरक्षा अत्यधिक मजबूत करने के लिए रूस के सैकड़ों सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे, साथ ही ऑपरेटिव्स भी तैनात किए थे. जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि अमेरिका अपना पूरा कब्जा वेनेजुएला पर करना चाहता है, तो इसके बदले उसे यूक्रेन से अपना समर्थन कम करना होगा. हिल ने आगे कहा कि ट्रंप ने ऐसा करने की कोशिश भी की. जिसके चलते उसने साल 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान यूक्रेन की मदद नहीं की थी. जिसमें उसने 40 करोड़ डॉलर की मदद को रोक दिया था.