डेली24 भारत डेस्क: हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह, जो अपनी दो शिष्याओं के साथ यौन शोषण के मामले में 20 साल की जेल की सजा काट रहे हैं, उनको 4 दिसंबर को 40 दिन की पैरोल दी गई. कड़ी सुरक्षा के बीच डेरा प्रमुख को सुनारिया जेल से सिरसा डेरे के लिए रवाना किया गया. पैरोल के दौरान राम रहीम डेरे में ही रहेंगे.
डेरा प्रमुख को लेने उनके परिवार के सदस्य, जिसमें उनकी मुंह बोली बेटी हनीप्रीत भी शामिल थीं, सुनारिया जेल पहुंचे. जानकारी के अनुसार, राम रहीम के सिरसा डेरे में जाने की वजह आगामी 25 जनवरी को वहां आयोजित बड़े आयोजन को माना जा रहा है. इस तरह के आयोजनों के मद्देनजर उन्हें सीमित अवधि की पैरोल दी गई है.
राम रहीम को पहले भी कई बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है. साल 2017 में अपनी दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से उन्हें कुल 14 बार जेल से बाहर जाने की अनुमति मिल चुकी है. इनमें अगस्त 2024 में 40 दिन की पैरोल, अप्रैल 2024 में 21 दिन की फरलो, और जनवरी 2024 में 30 दिन की पैरोल शामिल हैं. इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में उन्हें हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले 20 दिन की पैरोल दी गई थी. इसी तरह, 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक दो सप्ताह पहले उन्हें तीन सप्ताह की फरलो दी गई थी.
राम रहीम के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबे समय से जारी हैं. साल 2017 में यौन शोषण के मामले में सजा के अलावा, उन्हें 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा पत्रकार रामचंद्र की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई थी. इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी दोषी ठहराया गया था. हालांकि, राम रहीम को जेल से मिलने वाली पैरोल और फरलो ने हमेशा ही विपक्ष और समाज के कुछ हिस्सों में विवाद को जन्म दिया है. विशेषज्ञों और सिख संगठनों, जैसे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति, ने राम रहीम को बार-बार राहत देने की आलोचना की है. उनका कहना है कि ऐसे अपराधियों को समय पर सजा दिलाना और जेल में रहना न्यायिक प्रक्रिया की आवश्यकता है. वहीं, डेरा समर्थक और परिवारजन पैरोल को कानूनी रूप से मान्य मानते हुए इसे डेरा और समाज के आयोजन से जोड़कर देखते हैं.
राम रहीम के पैरोल के दौरान सिरसा डेरे में रहने की संभावना जताई जा रही है. यह डेरे में आयोजित होने वाले आयोजन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं. जेल से बाहर निकलते समय भी उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच ही सिरसा के लिए रवाना किया गया. राम रहीम को इससे पहले भी विभिन्न चुनावों और बड़े आयोजनों के समय पैरोल मिलती रही है. इस प्रकार, पैरोल की अवधि और समय पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इसे भारतीय कानून के तहत दी जाने वाली सुविधा के रूप में देखा जाता है.
राम रहीम का मामला समाज और मीडिया के लिए लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है. यौन शोषण और हत्या के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद, पैरोल और फरलो मिलने के कारण न्यायिक प्रक्रिया और कानून के पालन पर बहस जारी रहती है. इसके अलावा, उनके डेरे समर्थकों और विरोधियों के बीच लगातार मतभेद और टकराव देखने को मिलते रहे हैं. इस बार की 40 दिन की पैरोल भी इसी विवाद और चर्चा का हिस्सा बन गई है. सुरक्षा के इंतजामों के बीच, डेरा प्रमुख के सिरसा डेरे पहुंचने के बाद आगामी कार्यक्रम और उनका सार्वजनिक प्रभाव सभी के लिए निगरानी का विषय रहेगा.
राम रहीम सिंह के जेल से बाहर आने और डेरे में रहने की यह प्रक्रिया एक बार फिर यह दिखाती है कि भारतीय न्याय व्यवस्था और पैरोल की नीतियों में संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. जबकि समाज का एक बड़ा हिस्सा उनके खिलाफ न्याय के पक्ष में है, दूसरी ओर उनके समर्थक उन्हें कानूनी रूप से मिलने वाली राहत के रूप में देखते हैं.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर