Daily 24 भारत डेस्क: साल 2025 की बात करें तो भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिले। इसी बीच भारतीयों को निकाले जाने वाले मामले में एक बड़ा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारतीयों को निकाले जाने वाले देशों में सबसे ज्यादा नाम लोग अमेरिका का लेते हैं। जिनके अनुसार अमेरिका में ट्रंप की सरकार आने के बाद सबसे ज्यादा भारतीयों को निकाला गया है। लेकिन, इस मामले पर जो खुलासा हुआ है, उनके अनुसार कहानी कुछ और ही कह रही है। इस मामले का खुलासा किया है विदेश मंत्रालय के डेटा ने, विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, भारतीयों को सबसे ज्यादा डिपोर्ट करने वाला देश अमेरिका नहीं बल्कि मुस्लिम राष्ट्र देश सऊदी अरब है।
विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने 2025 में करीब 11 हजार भारतीयों को वापस भेजा है। जो किसी भी देश में किए गए भारतीयों के डिपोर्ट से अधिक है। सऊदी अरब से निकाले गए भारतीयों में मजदूर और प्राइवेट सेक्टर के लोग शामिल हैं। इन लोगों को भारत भेजने का कारण वीजा उल्लंघन, अवैध प्रवास या स्थानीय कानूनों के उल्लंघन है। जिसके आरोपों के कारण इन सभी भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। वहीं 2025 में अमेरिका ने भी लगभग 3800 भारतीयों को डिपोर्ट किया। जो अमेरिका से हुए अब तक के डिपोर्ट में सबसे अधिक है, लेकिन वहीं यह आंकड़ा सऊदी अरब के आंकड़े से बेहद कम है। वहीं अमेरिका से जिन लोगों को डिपोर्ट किया गया , उनमें ज्यादातर प्राइवेट सेक्टर के लोग शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में कुल मिलाकर 81 देशों से भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। जिनमें लगभग 24,600 से अधिक भारतीयों को वापस भेजा गया है। दरअसल, भारतीयों को वापस भेजने के मामला इसलिए भी है, यहां पर भारतीयों की संख्या लगभग 19 से 27 लाख है। जिसके चलते निर्माण, स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों में लाखों भारतीय काम करते हैं। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार एजेंटो की धोखाधड़ी, स्थानीय कानूनों का उल्लंघन और वीजा नियमों का सख्ती से पालन न करना भारतीयों को सऊदी से वापस भेजने के मुख्य कारण है।
विदेश मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में एक रिपोर्ट पेश की गई। जिसके अनुसार अमेरिका ने पिछले 12 महीनों में 3800 भारतीयों को निर्वासित किया। जिसके अंतर्गत अधिकांश कार्रवाई वाशिंगटन डीसी और ह्यूस्टन से की गई। जिसमें वाशिंगटन से (3414) और ह्यूस्टन से (234) भारतीयों को निकाला गया। वहीं इस दौरान भारत में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ विरोध भी किया गया। विशेषज्ञों ने भी माना की ट्रंप सरकार में शुरू हुई सख्ती और दस्तावेजों की कड़ी जांच के तहत यह काम किया गया। जिनमें वीजा स्टेटस, वर्क ऑथराइजेशन और ओवरस्टे जैसी जांचें भी शामिल हैं।
भीमा रेड्डी के अनुसार खाड़ी देशों में भारतीयों का बड़ी संख्या में जाने का कारण भारतीय श्रमिक क्षेत्र, केयरगिविंग और घरेलू काम हैं। इनमें से कई भारतीय कम कौशल वाले कामगार एजेंटों के जरिए जाते हैं। जिसके चलते वह अतिरिक्त कमाई करने की कोशिश में मामूली अपराधों या नियम उल्लंघनों के बीच फंस जाते हैं। वहीं कई मामलों में एजेंटों द्वारा ठगी और स्थानीय कानूनों की कम जानकारी के कारण भी यह मामले सामने आते हैं।