लता के.सी/डेली24भारत: यूं तो सड़क हादसे को लेकर तमाम दावे और वादे किए जाते हैं हर साल सख्त से सख्त नियम भी लागू होते हैं लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं और एक बार फिर से सड़क के नियमों का याद आना इसलिए मजबूरी है क्योकि 24 घंटे के अंदर जो अलग अलग राज्यों से जो हादसों की दर्दनाक तस्वीरें सामने आई हैं उन तस्नीरों ने रौंगटे खड़े कर दिए हैं 3 ऐसे दर्दनाक हादसे जिसने आपकी रुंह कंपा दी होगी.
24 घंटे में 3 दर्दनाक हादसे
इसमें पहली तस्वीर बीते शाम राजस्थान के जोधपुर से सामने आई जहां श्रद्धालुओं से भरी एक बस सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में पीछे से जा घुसी, बता दें कि बस में सवार यात्री जोधपुर के सूरसागर क्षेत्र से बीकानेर जिले के कोलायत दर्शन कर लौट रहे थे….तो वहीं दूसरी तस्वीर आज सुबह तेलंगाना के रंगारेड्डी से सामने आई जहां हादसा चेवेला मंडल के खनापुर गेट के पास उस समय हुआ जब TGSRTCकी बस और एक टिपर ट्रक आमने-सामने टकरा गए, पुलिस के मुताबिक, हादसा सुबह के समय हुआ जब टिपर गलत दिशा से आ रहा था और बस से जा भिड़ा,पुलिस के मुताबिक, चेवेला के पास एक टिपर ट्रक, जो ग्रेवल से भरा हुआ था, ने राज्य परिवहन निगम की बस को सामने से टक्कर मार दी थी, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का माल बस पर जा गिरा जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, वहीं शाम होते होते हादसे की एक और तस्वीर जयपुर से सामने आई जहां राजधानी जयपुर के हरमाड़ा इलाके में एक भयावह सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया।तेज रफ्तार डंपर ने 300 मीटर तक बेकाबू होकर 17 गाड़ियों को रौंद दिया, जिससे मौके पर 14 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए, हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद गाड़ियां आपस में टकराकर क्षतिग्रस्त हो गईं और सड़क पर चीख-पुकार मच गई।
पिछले एक महीने में कितने हादसे ?
बीते महीने कई दर्दनाक हादसे सामने आए, जिसका सिलसिला अभी भी जारी है। इनमें से कई हादसे राजस्थान में हुए हैं। इन हादसों में 60 से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी हैं। ज्यादातर हादसे एक्सीडेंट की वजह से हुए हैं। इन हादसों में जैसलमेर, जयपुर, जोधपुर और फिर तेलंगाना के हादसे शामिल हैं
2025 में कितने सड़क हादसे ?
वहीं यातायात निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में 1 जनवरी से लेकर 31 जुलाई के बीच प्रदेश भर में 29,917 सड़क हादसे हुए। इनमें 16,337 लोगों ने जान गंवाई। जबकि 22,627 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए।
सड़क दुर्घटना रोकने के सख्त नियम-
- सड़क अवसंरचना में सुधार
- सड़क मार्किंग और साइनबोर्ड लगाना
- क्रैश बैरियर और रेज़्ड पावेमेंट मार्कर
- ज्यामितीय सुधार और जंक्शन का पुनः डिज़ाइन
- सड़क चौड़ीकरण
- अंडरपास और ओवरपास का निर्माण
सख्त नियम तो क्यों हो रहे हादसे ?
ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि जब सड़कों को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं तो आखिर इसे अमल में क्यों नहीं जाता. सख्त नियमों के बावजूद क्यों हादसों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है हालाकि इसे लेकर सरकार ने खुद भी ये स्वीकार किया है कि खराब सड़क इंजीनियरिंग की वजह से दुर्घटना में मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है. नितिन गडकरी ने कई बार सलाहकारों और ठेकेदारों की घटिया डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट और त्रुटिपूर्ण सड़क डिज़ाइन के लिए आलोचना की है।
पिछले 10 साल में हादसे में मरे 13 लाख लोग
दरअसल विश्व बैंक की 2021 में आई एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भारत में दुनिया के एक प्रतिशत वाहन हैं लेकिन सड़कों पर वाहन दुर्घटनाओं के चलते विश्वभर में होने वाली मौतों में 11 प्रतिशत मौतें भारत में होती हैं। देश में हर घंटे 53 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और हर चार मिनट में एक मौत होती है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में भारतीय सड़कों पर 13 लाख लोगों की मौतें हुई हैं और इनके अलावा 50 लाख लोग घायल हुए हैं.यही नहीं रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं के चलते 5.96 लाख करोड़ रुपये जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद ) के 3.14 प्रतिशत के बराबर नुकसान होता है। इसके अलावा भारत में आकस्मिक मौतौं में सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों का आंकड़ा 15 प्रतिसत से लेकर 20 प्रतिशत शुमार होता है जो कि एक चिंता का विषय है
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार वर्ष 2022 में कुल 7 लाख 688 दुर्घटनाएं रिपोर्ट की गईं, जिनमें 4 लाख 22 हजार 444 लोगों की मृत्यु हुई और 4 लाख 28,435 लोग घायल हुए। इनमें 46 प्रतिशत असामयिक मौतें यातायात हादसों में हुई हैं. हालांकि, भारत सरकार और राज्य सरकारों की ओर से इन हादसों पर नियंत्रण के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इसका कोई भी असर होता दिखाई नहीं पड़ रहा है ।