डेली24 भारत डेस्क: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सबसे अहम इम्तिहान नालंदा जिले में होने जा रहा है। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के विकास मॉडल और राजनीतिक पकड़ का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। सवाल यही है — क्या इस बार नालंदा की सातों सीटों पर NDA “सप्तऋषि” बन पाएगा, या पिछली बार की तरह फिर कोई सीट हाथ से फिसल जाएगी?
नालंदा जिले की सात विधानसभा सीटों में फिलहाल छह सीटें एनडीए के पास हैं — अस्थावां, राजगीर, बिहारशरीफ, हिलसा, नालंदा और हरनौत — जबकि इस्लामपुर सीट राजद के कब्जे में है। दिलचस्प बात यह है कि नालंदा में चाहे किसी भी उम्मीदवार को टिकट मिले, मुकाबला हमेशा नीतीश कुमार बनाम बाकी सभी के बीच होता है।
अस्थावां विधानसभा
2020 में जदयू के जितेंद्र कुमार ने राजद के अनिल कुमार को हराया था। इस बार जदयू ने सीटिंग विधायक जितेंद्र कुमार पर ही भरोसा जताया है, जबकि राजद ने नए चेहरे रवि रंजन को मैदान में उतारा है।
राजगीर विधानसभा
जदयू के कौशल किशोर ने पिछली बार राजद के रवि ज्योति को 16 हजार से अधिक मतों से हराया था। अब 2025 में राजद ने यह सीट सीपीआई को दी है, जहां से विश्वनाथ चौधरी मैदान में हैं। मुकाबला एक बार फिर दिलचस्प रहने वाला है।
बिहारशरीफ विधानसभा
2020 में जदयू के डॉ. सुनील कुमार ने जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार महागठबंधन में कलह दिख रही है — सीपीआई से शिव कुमार और कांग्रेस से उमेश कुमार मैदान में हैं। यह दोस्ताना टकराव महागठबंधन के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
हिलसा विधानसभा
यह सीट 2020 में सबसे कड़े मुकाबले का केंद्र रही, जहां जदयू के कृष्ण मुरारी शरण ने राजद के शक्ति सिंह यादव को महज़ 12 वोटों के अंतर से हराया था। दोनों के बीच अब 2025 में रीमैच तय है।
नालंदा विधानसभा
यहां जदयू मंत्री श्रवण कुमार ने पिछली बार जीत दर्ज की थी। इस बार उनके सामने राजद के कौशलेंद्र कुमार हैं, जो 2020 में किसी अन्य पार्टी से मैदान में थे। मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर है।
हरनौत विधानसभा
यह सीट खुद नीतीश कुमार का राजनीतिक गढ़ मानी जाती है। 2020 में जदयू के हरिनारायण सिंह ने आरामदायक जीत हासिल की थी। इस बार कांग्रेस के अरविंद बिंद मैदान में हैं, जबकि लोजपा इस सीट से बाहर हो चुकी है।
इस्लामपुर विधानसभा
नालंदा की एकमात्र सीट जहां 2020 में राजद के राकेश रौशन ने जीत हासिल की थी। अब एनडीए ने रुहैल रंजन को मैदान में उतारकर यह सीट वापस लेने का लक्ष्य तय किया है।
2025 का नालंदा चुनाव केवल सात सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की साख, उनके नेतृत्व और जन समर्थन की परीक्षा भी है। अगर एनडीए सभी सीटें जीत लेता है, तो नालंदा सचमुच “सप्तऋषि” मॉडल का प्रतीक बन जाएगा। अब देखना यह होगा कि जाति समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और सुशासन का मुद्दा नालंदा के मतदाता कितनी गंभीरता से अपनाते हैं।
भावना सिंह, प्रोडेयूसर