डेली24भारत डेस्क: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक बार फिर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन Strait of Hormuz को लेकर स्थिति गंभीर हो गई है। पहले इसे खोलने का संकेत देकर राहत का माहौल बनाया गया, लेकिन अब Iran ने अचानक फिर से इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद करने का फैसला कर वैश्विक बाज़ारों और खासकर India जैसे तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है।
फिर बंद हुआ होर्मुज स्ट्रेट, क्या है पूरा घटनाक्रम?
शुक्रवार को तेहरान की ओर से संकेत मिला था कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाएगा, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा संकट जल्द कम हो सकता है। लेकिन शनिवार को हालात अचानक बदल गए। ईरान ने United States पर सीजफायर उल्लंघन और नाकेबंदी जारी रखने का आरोप लगाते हुए स्ट्रेट को दोबारा बंद करने की घोषणा कर दी।
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि:
“होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण अब पूरी तरह सशस्त्र बलों के सख्त प्रबंधन और निगरानी में है, और जब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी रोक जारी रहेगी, तब तक इस रास्ते से जहाज़ों की आवाजाही भी सीमित या बंद रखी जाएगी।”
इस बयान ने साफ संकेत दे दिया है कि स्थिति अभी स्थिर नहीं है और तनाव आगे भी बढ़ सकता है।
दुनिया के लिए क्यों इतना अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले कच्चे तेल का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। खाड़ी देशों—जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई—से निकलने वाला अधिकांश तेल इसी रास्ते से एशिया और यूरोप तक पहुंचता है।
ऐसे में इस स्ट्रेट का बंद होना सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित करता है। परिणामस्वरूप:
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका
- एलपीजी सप्लाई में बाधा
- वैश्विक शिपिंग लागत में वृद्धि
जैसे असर तुरंत दिखने लगते हैं।
भारत पर कितना पड़ेगा असर?
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट में कोई भी रुकावट भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डालती है।
अगर स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो संभावित असर ये हो सकते हैं:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि
- एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित
- परिवहन खर्च बढ़ना
- खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ना
- लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर अतिरिक्त दबाव
- महंगाई दर में तेजी
यानी इसका असर सीधे आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है।
पहले भी दिखा असर, अब बढ़ सकती है चिंता
जब हाल ही में पहली बार होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ था, तब ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी थीं। कई देशों में ईंधन महंगा हुआ और भारत में भी सरकार को तेल से जुड़े टैक्स ढांचे में कुछ बदलाव करने पड़े थे। साथ ही कुछ क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई थीं।
अब दोबारा बंद होने से यह संकट और गहरा सकता है।
क्या जल्द खुल सकता है रास्ता?
हालांकि स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जरूर है, लेकिन कूटनीतिक बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष कुछ शर्तों पर सहमत हो जाते हैं, तो:
- समुद्री मार्ग फिर से खोला जा सकता है
- तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है
- वैश्विक बाजार स्थिर हो सकता है
इसलिए अब पूरी दुनिया की नजर आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर