Daily 24 भारत डेस्क: यूपी के अयोध्या में भगवान श्री राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है. राम मंदिर भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बन चुका है और हजारों-लाखों की संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए आ रहे हैं. पीएम मोदी समेत भाजपा और विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं ने राम मंदिर के दर्शन किए हैं. हालांकि, अब तक कांग्रस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने पर सवाल उठते रहे हैं. अब जानकारी सामने आई है कि राहुल गांधी जल्द ही राम मंदिर में दर्शन के लिए जा सकते हैं.
अयोध्या राम मंदिर को लेकर सियासी हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी जल्द ही रामलला के दर्शन कर सकते हैं. बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अब राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और मंदिर पर ध्वज भी लग चुका है, इसलिए राहुल गांधी रामलला के दर्शन करेंगे. तनुज पुनिया ने कहा कि जब मंदिर अधूरा था, तब वहां पूजा-पाठ नहीं किया गया, लेकिन अब मंदिर पूर्ण रूप से तैयार है. ऐसे में राहुल गांधी का अयोध्या जाना स्वाभाविक है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की आस्था पर सवाल उठाना अनुचित है.दरअसल, 23 जनवरी को 32 सदस्यीय संसदीय समिति अयोध्या के दौरे पर पहुंचने वाली है. इस समिति में राहुल गांधी भी शामिल हैं. समिति के अयोध्या आगमन और राहुल गांधी के रामलला दर्शन को लेकर राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.
गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2016 में राहुल गांधी अयोध्या आए थे. उस दौरान उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन किए थे और संतों से आशीर्वाद लिया था, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए थे. वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी आमंत्रित किया गया था. राहुल गांधी के संभावित दौरे को लेकर संत समाज की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग पहले भगवान राम को काल्पनिक बताते थे, आज वही रामलला के दर्शन की बात कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम की शरण में आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है.वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राहुल गांधी के आगमन का स्वागत करते हुए सवाल भी उठाए. उन्होंने कहा कि राम की शरण में कोई भी, कभी भी आ सकता है, लेकिन यह दौरा राजनीतिक दिखावे जैसा प्रतीत होता है. उनका कहना है कि कांग्रेस जनता का भरोसा खो चुकी है और अब पार्टी को जीवित रखने के लिए राम भक्ति का सहारा लिया जा रहा है. अब सबकी निगाहें 23 जनवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि राहुल गांधी का अयोध्या दौरा धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा या सियासी संदेश.