डेली24 भारत डेस्क: अमेरिका में एक बार फिर सख्त इमिग्रेशन नीति चर्चा के केंद्र में है. डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से अमेरिकी प्रशासन ने वीजा नियमों को जिस तेजी और कठोरता से लागू किया है, उसने पूरी दुनिया, खासकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ा दी है. अमेरिकी विदेश विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक एक लाख से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं, जो किसी एक वर्ष में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है.
विदेश विभाग ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह कदम अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है. विभाग ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “हम अमेरिका को सुरक्षित रखने के लिए इन बदमाशों को डिपोर्ट करना जारी रखेंगे।”. पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब तक 1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए गए हैं, जिनमें लगभग 8 हजार स्टूडेंट वीजा और 2,500 स्पेशलाइज्ड कैटेगरी के वीजा शामिल हैं.
वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला। अमेरिका ने विदेशियों के रिकॉर्ड 1 लाख वीजा रद्द किए। इमिग्रेशन नियमों में सख्ती के तहत कार्रवाई।@realDonaldTrump #DonaldTrump #VisaCancellation #USVisa pic.twitter.com/J3oNgWQbBf
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 13, 2026
वीजा रद्द किए जाने के पीछे कई कारण बताए गए हैं. विदेश विभाग के अनुसार, हजारों मामलों में वीजा धारकों पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप पाए गए. इनमें मारपीट, घरेलू हिंसा, नशे की हालत में वाहन चलाने जैसे अपराध शामिल हैं. विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जा रही है. विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और देश की सीमाओं व कानूनों की रक्षा करना है. आंकड़ों की तुलना करें तो यह सख्ती और भी स्पष्ट हो जाती है. 20 जनवरी 2025 को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से जितने वीजा रद्द किए गए हैं, वह संख्या जो बाइडन प्रशासन के पूरे साल 2024 की तुलना में लगभग ढाई गुना ज्यादा है. इससे साफ है कि नई सरकार इमिग्रेशन और वीजा नीति को लेकर कहीं अधिक आक्रामक रुख अपना रही है.
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लेकर हो रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विशेष रूप से उन छात्रों के वीजा रद्द करने पर जोर दिया है, जिन्होंने इजरायल के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. इसके लिए उन्होंने एक पुराने कानून का हवाला दिया है, जिसके तहत अमेरिकी विदेश नीति के खिलाफ गतिविधियों में शामिल विदेशियों के अमेरिका में प्रवेश या वहां रहने पर रोक लगाई जा सकती है. इस कदम को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति के अधिकार पर बहस भी तेज हो गई है.
सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि कामकाजी वीजा धारक भी इस सख्ती से प्रभावित हो रहे हैं. 15 दिसंबर से अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने H-1B वीजा की गहन स्क्रीनिंग प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है। इसके दायरे में H-4 वीजा भी शामिल हैं. अब आवेदकों की सोशल मीडिया गतिविधियों तक की जांच की जा रही है, जिससे कई मामलों में इंटरव्यू टल गए हैं और प्रक्रिया लंबी हो गई है. विदेश मंत्रालय बार-बार यह स्पष्ट करता रहा है कि अमेरिकी वीजा कोई अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा है, जिसे नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कभी भी वापस लिया जा सकता है.
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन की नई वीजा नीति अमेरिका में सख्त कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है. हालांकि, इसके चलते अमेरिका की वैश्विक छवि, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या और विदेशी प्रतिभाओं के आकर्षण पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा. इतना तय है कि अमेरिका में रहने या वहां जाने की योजना बना रहे लोगों के लिए अब पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर