Daily 24 भारत डेस्क: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस को लेकर हड़कंप मच गया है. उत्तर 24 परगना के बारासात में दो नर्सों में निपाह संक्रमण का संदेह जताया गया है, जिनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है.बारासात के एक निजी अस्पताल में काम करने वाली दो नर्सों में निपाह वायरस संक्रमण की आशंका के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. दोनों की हालत नाजुक है और उन्हें वेंटिलेशन सपोर्ट पर रखा गया है.डॉक्टरों के मुताबिक, एक नर्स को इनवेसिव वेंटिलेशन और दूसरी को नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन दिया गया है.
दोनों को हाई-ग्रेड एंटीवायरल दवाएं दी जा रही हैं.पहले कल्याणी एम्स में जांच के बाद निपाह का संदेह गहराया, जिसके बाद पुष्टि के लिए नमूने पुणे की लैब भेजे गए हैं. ब्रेन स्कैन रिपोर्ट में भी निपाह वायरस के लक्षण मिलने की बात कही जा रही है.स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि ये दोनों नर्स हाल के दिनों में किन-किन लोगों के संपर्क में आई थीं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों 110 से 120 लोगों के संपर्क में थीं. सभी को आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए हैं.
राज्य स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है और हर स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है. निपाह वायरस का नाम सुनते ही डर इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसका इतिहास बेहद घातक रहा है. आइए समझते हैं यह वायरस कितना खतरनाक है.निपाह वायरस का पहली बार पता 1998 में मलेशिया में चला था, जहां यह एक सूअर फार्म से फैला. उस दौरान 265 लोग संक्रमित हुए और 108 लोगों की मौत हो गई.1999 में सिंगापुर में भी निपाह संक्रमण के मामले सामने आए. भारत में 2007 में सिलीगुड़ी में पहली बार निपाह वायरस की पुष्टि हुई थी.
ताजा मामले पश्चिम बंगाल से सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है. बीमार नर्सों में से एक पूर्व बर्दवान के काटोआ की रहने वाली है. हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले बर्दवान मेडिकल कॉलेज और फिर बारासात के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.काटोआ सब-डिविजनल अस्पताल की दो नर्सों, एक स्वीपर और एक निजी एम्बुलेंस चालक को क्वारंटाइन किया गया है.बेलेघाटा आईडी अस्पताल को निर्देश दिए गए हैं कि निपाह के संभावित मरीजों के लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार रखा जाए. सीसीयू आइसोलेशन केबिन पूरी तरह तैयार हैं.