डेली24भारत डेस्क: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को अपने प्रतिष्ठित पीएसएलवी कार्यक्रम में एक गंभीर असफलता का सामना करना पड़ा है। सोमवार को प्रक्षेपित किया गया PSLV-C62 रॉकेट सफल टेक-ऑफ के बावजूद अपने साथ ले जाए गए उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित नहीं कर सका। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि रॉकेट ने तीसरे चरण के दौरान अपनी दिशा और संतुलन पर नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण मिशन को सफल नहीं माना जा सकता।
PSLV-C62 लॉन्च में ISRO को झटका। रॉकेट लॉन्चिंग सफल रही, लेकिन सैटेलाइट ऑर्बिट में तैनात नहीं हो सका।@isro #ISRO #PSLVC62 #Anvesha pic.twitter.com/WFEBQNz1Wn
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 12, 2026
यह लगातार दूसरा ऐसा PSLV मिशन है जिसमें तीसरे चरण में तकनीकी समस्या सामने आई है, जिससे वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसी की चिंता बढ़ गई है। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए इस विफलता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि रॉकेट के पहले तीन चरण पूरी तरह सामान्य रहे थे, लेकिन उसके बाद एक तकनीकी विसंगति उत्पन्न हुई, जिससे उड़ान अपने निर्धारित मार्ग से भटक गई और मिशन को पूरा नहीं किया जा सका। उन्होंने यह भी बताया कि सभी उड़ान और टेलीमेट्री डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही विफलता के वास्तविक कारणों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
PSLV-C62 अपने साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का विशेष ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट अन्वेषा लेकर गया था, जिसे रणनीतिक निगरानी और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए डिजाइन किया गया था। इसके अलावा इस मिशन में 15 से अधिक छोटे उपग्रह भी शामिल थे, जिनमें कई भारतीय स्टार्ट-अप्स, विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के थे। हैदराबाद की कंपनी ध्रुवा स्पेस ने इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कुल सात उपग्रहों में योगदान दिया, जिनमें से चार उपग्रह उसने स्वयं विकसित किए थे। ये उपग्रह मुख्य रूप से कम डेटा दर वाले संचार के लिए बनाए गए थे।
PSLV-C62 मिशन में ISRO को झटका! …ऑर्बिट तक नहीं पहुंचा अन्वेषा सैटेलाइट@isro #ISRO #PSLVC62 #AnveshaSatellite pic.twitter.com/akVPqjeK3w
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यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड द्वारा संचालित नौवां व्यावसायिक अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन था। पीएसएलवी को विश्व के सबसे भरोसेमंद रॉकेटों में से एक माना जाता है, जिसने पहले चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 जैसे बड़े और ऐतिहासिक अभियानों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है। हालांकि, इस बार 12 जनवरी को सफल प्रक्षेपण के बावजूद कक्षा में उपग्रहों की सही स्थापना न हो पाने के कारण पूरा मिशन विफल हो गया।
इस घटना को इसरो और भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र दोनों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इसरो की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस महत्वपूर्ण मिशन में तकनीकी चूक आखिर किस स्तर पर हुई।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर