डेली24 भारत डेस्क: दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझती रही है. सर्दियों के आते ही यह मुद्दा हर साल चर्चा के केंद्र में आ जाता है, लेकिन अब दिल्ली सरकार इसे केवल मौसमी संकट मानने के बजाय सालभर की चुनौती के रूप में देख रही है. शुक्रवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले 11 महीनों में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस दिशा में केवल योजनाएं नहीं बनाई हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने के लिए ठोस और निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सदन को बताया कि राजधानी में सड़कों को डस्ट फ्री बनाने के लिए बड़े पैमाने पर वाटर स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन्स और आधुनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है. धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली नगर निगम को 2300 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे कूड़ा प्रबंधन और धूल नियंत्रण पर विशेष फोकस किया जा रहा है. इन संसाधनों के जरिए सड़कों की नियमित सफाई, कंस्ट्रक्शन साइट्स की निगरानी और खुले में फैले मलबे को हटाने का काम तेज किया गया है.
परिवहन क्षेत्र में सुधार को प्रदूषण नियंत्रण की अहम कड़ी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का काम शुरू हो चुका है, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी. इसके साथ ही वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए “नो पीयूसी, नो फ्यूल” नीति को सख्ती से लागू किया गया है. इस व्यवस्था के तहत प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र के बिना किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जा रहा है. इसी क्रम में बुराड़ी फिटनेस सेंटर का अपग्रेडेशन किया गया है और नंदनगरी व टेकखंड में ऑटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग स्टेशनों का शिलान्यास भी किया गया है.
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा दे रही है. इलेक्ट्रिक DEVI बसों की शुरुआत के साथ-साथ ई-ऑटो और ई-टैक्सी को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि सार्वजनिक और निजी परिवहन दोनों में प्रदूषण कम किया जा सके. उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण को एक व्यापक, सतत और व्यवस्था-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ाना है. सदन में अपने संबोधन के दौरान रेखा गुप्ता ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रदूषण कोई दो-तीन महीनों की समस्या नहीं है. उन्होंने कहा की अगर हमें वास्तव में प्रदूषण कम करना है और पर्यावरण को बेहतर बनाना है, तो 12 के 12 महीने लगातार काम करना होगा. सड़कों पर एजेंसियों को सालभर सक्रिय रखना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक और हर परिवार की साझा जिम्मेदारी है.
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि 2014 से 2025 तक वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानियों में गिना, लेकिन रेखा गुप्ता सरकार के आने के बाद स्थिति बदलने के लिए “एक्शन मोड” में काम हो रहा है. उन्होंने बताया कि ओखला, भलस्वा और गाजीपुर की तीनों लैंडफिल साइट्स पर बायोमाइनिंग के जरिए हर महीने हजारों टन कचरा हटाया जा रहा है। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन साइट्स और औद्योगिक क्षेत्रों में कड़ी निगरानी, भारी जुर्माने और सीलिंग जैसी सख्त कार्रवाइयों से नियमों का उल्लंघन करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है.
दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक और समग्र रणनीति के तहत काम कर रही है. यदि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की हवा को साफ और जीवन को स्वस्थ बनाने की दिशा में ठोस बदलाव संभव है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर