डेली24भारत डेस्क: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) की मौजूदगी के बिना किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम काटे जाएं, उनकी पूरी सूची सार्वजनिक रूप से चस्पा की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
अखिलेश यादव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो पीडीए प्रहरी और बीएलए मिलकर एफआईआर दर्ज कराएंगे। उन्होंने वोटर लिस्ट को आधार से जोड़ने की मांग दोहराई, लेकिन साथ ही आरोप लगाया कि बीजेपी फर्जी आधार कार्ड बनवाने का काम कर रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे में आधार कार्ड भी कागज के बजाय मेटल का बनाया जाना चाहिए, ताकि उसमें छेड़छाड़ न हो सके।
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अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के नाम पर देश में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स) को चुपचाप लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा मुद्दों के बल पर चुनाव जीतने में असमर्थ है, इसलिए अब वह वोटर लिस्ट में डिजिटल और प्रशासनिक हेराफेरी का सहारा ले रही है।
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि पहले आशंका जताई जा रही थी कि करीब 3 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाएंगे, लेकिन जब ड्राफ्ट सूची भी जारी नहीं हुई थी, उसी समय मुख्यमंत्री ने यह बयान दे दिया कि 4 करोड़ वोट काटे जा रहे हैं। अखिलेश ने सवाल उठाया कि जब आम जनता को कोई जानकारी नहीं थी, तब मुख्यमंत्री को यह आंकड़ा कैसे पता था? उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि ये भाजपा के वोट हैं, जिनकी बात की जा रही है।
उन्होंने कन्नौज के पूर्व सांसद के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जिले में अब तक तीन लाख वोट काटे जा चुके हैं, जबकि अभी दो विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग जिलों में आते हैं, जहाँ आगे और वोट काटे जाने की आशंका है। अखिलेश यादव ने सवाल किया कि जब भाजपा नेता खुद यह बातें कह रहे हैं, तो फिर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता (क्रेडिबिलिटी) पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
वोटर लिस्ट और SIR पर बड़े सवाल
अखिलेश यादव ने पंचायत चुनाव की मतदाता सूची और एसआईआर के बाद बनी विधानसभा चुनाव की सूची में भारी अंतर को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह अंतर किसी सामान्य प्रक्रिया का परिणाम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश और षड्यंत्र का संकेत देता है। उनका आरोप है कि पीडीए समाज (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के वोट काटने और अपने समर्थकों के वोट बढ़ाने की रणनीति पर काम हो रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) दोनों सूचियों पर काम कर रहा है, तो फिर मतदाता सूचियों में इतना बड़ा अंतर कैसे आ सकता है? अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग मैपिंग के नाम पर करीब 2 करोड़ लोगों को ‘अनमैप्ड’ कर रहा है, जो वास्तव में विपक्ष के मतदाताओं को सूची से बाहर करने की साजिश है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं चुनाव आयोग SIR की आड़ में देश में चोरी-छिपे NRC लागू करने की कोशिश तो नहीं कर रहा।
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“भाजपा गलती नहीं, जानबूझकर हेराफेरी करती है”
सपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि भाजपा की आइडियोलॉजी से जुड़े अधिकारी खास तौर पर उन बूथों पर तैनात किए जा रहे हैं, जहाँ पीडीए समाज का मतदाता आधार मजबूत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर बूथ पर अपने 200 वोट बढ़ाने और विपक्ष के वोट काटने का निर्देश दिया है। इसके लिए फर्जी आधार कार्ड तक बनाए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने दोहराया कि बीएलए की मौजूदगी में ही वोट काटे जाएं और उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे।
पुरानी रंजिश और “12 बोर की बंदूक” का प्रतीकात्मक संदेश
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने एक प्रतीकात्मक कहानी सुनाई। उन्होंने कहा, “जब मैं लाठी मांगूं, तो तुम 12 बोर की बंदूक ले आना।” इस उदाहरण के जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार रहने और अन्याय का मजबूती से जवाब देने का संदेश दिया।
उन्होंने रामपुर, अयोध्या और कुंदरकी में हुए उपचुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहाँ प्रशासन ने मतदाताओं को डरा-धमकाकर वोट डालने से रोका, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर