डेली24 भारत डेस्क: संसद का प्रश्नकाल आमतौर पर तीखे सवालों, राजनीतिक आरोपों और सत्ता-विपक्ष के बीच टकराव के लिए जाना जाता है, लेकिन 18वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान एक ऐसा दृश्य भी देखने को मिला, जिसने संसदीय लोकतंत्र के मानवीय और सहयोगात्मक चेहरे को उजागर कर दिया. 17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में सड़क परियोजनाओं पर चर्चा चल रही थी, तभी कांग्रेस सांसद और वायनाड से निर्वाचित प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात के लिए समय मांगा. यह क्षण केवल एक औपचारिक आग्रह नहीं था, बल्कि जनप्रतिनिधि और मंत्री के बीच संवाद की आवश्यकता का प्रतीक बन गया.
प्रश्नकाल के दौरान प्रियंका गांधी ने सीधे और सधे शब्दों में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, “सर, मैं जून महीने से आपसे अपॉइंटमेंट मांग रही हूं, लेकिन नहीं मिल रहा है. कृपया समय दे दीजिए.” उनकी आवाज़ में शिकायत कम और अपने संसदीय क्षेत्र की चिंता अधिक झलक रही थी. वायनाड, जो भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाका है, वहां सड़क निर्माण और रखरखाव लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रहा है. प्रियंका गांधी ने इन समस्याओं को सदन के पटल पर रखते हुए व्यक्तिगत मुलाकात की मांग की, ताकि जमीनी हालात पर विस्तार से चर्चा हो सके.
नितिन गडकरी का जवाब न सिर्फ तुरंत आया, बल्कि उसमें राजनीतिक औपचारिकता की जगह अपनापन झलकता था. हंसते हुए उन्होंने कहा, “अपॉइंटमेंट लेने की जरूरत नहीं है. मेरा दरवाजा हमेशा खुला रहता है. कभी भी आ जाइए. प्रश्नकाल के बाद मेरे ऑफिस में आ जाइए.” उनके इस बयान ने सदन के माहौल को हल्का कर दिया. यह संदेश साफ था कि जनहित के मुद्दों पर संवाद के लिए कोई दीवार नहीं होनी चाहिए. प्रियंका गांधी ने भी मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर मंत्री का अभिवादन किया, और सदन में कुछ पल के लिए राजनीति की जगह सौहार्द ने ले ली.
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— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) December 18, 2025
प्रश्नकाल समाप्त होते ही प्रियंका गांधी ने अपने आग्रह को औपचारिकता में नहीं छोड़ा. वे सीधे नितिन गडकरी के कार्यालय पहुंचीं, जहां लगभग दस मिनट तक दोनों के बीच बातचीत हुई. इस मुलाकात में वायनाड की सड़क परियोजनाओं, उनके रखरखाव और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई. गडकरी ने कुछ परियोजनाओं पर सकारात्मक रुख दिखाया, जबकि कुछ मामलों में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे राज्य सरकार के दायरे में आते हैं.
इस मुलाकात का एक दिलचस्प पहलू वह हल्का-फुल्का पल था, जिसने राजनीतिक बातचीत को मानवीय रंग दे दिया. गडकरी ने प्रियंका गांधी को चावल से बनी एक डिश खिलाई और मजाकिया अंदाज में कहा, “राहुल जी का काम किया, आपका नहीं करूंगा तो लोग कहेंगे कि भाई का काम किया और बहन का नहीं.” इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोग हंस पड़े और माहौल और सहज हो गया. यह क्षण बताता है कि गंभीर मुद्दों पर चर्चा भी मुस्कान और सहजता के साथ की जा सकती है.
राजनीतिक दृष्टि से यह घटना खास महत्व रखती है. नवंबर 2024 में वायनाड से सांसद चुनी गईं प्रियंका गांधी अपनी पहली लोकसभा सत्र में सक्रिय भूमिका निभाती नजर आ रही हैं. वहीं नितिन गडकरी की दोस्ताना प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि संसदीय कार्यवाही में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भी सहयोग संभव है. यह मुलाकात सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद का एक छोटा-सा, लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई.
इस घटना ने यह याद दिलाया कि संसद केवल बहस और असहमति का मंच नहीं है, बल्कि वह संवाद, समाधान और सौहार्द का भी केंद्र हो सकती है. जब जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर ईमानदारी से आवाज उठाते हैं और मंत्री खुले मन से सुनने को तैयार रहते हैं, तब लोकतंत्र और मजबूत होता है. शायद यही इस पूरे प्रसंग का सबसे बड़ा संदेश है की सवालों के बीच भी संवाद की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर