डेली24भारत डेस्क: संसद के मॉनसून सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब सरकार ने ग्रामीण रोज़गार से जुड़े एक नए क़ानून ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) – VB-G RAM G बिल, 2025’ को पेश किया और बाद में उसे पारित भी कर दिया। इस बिल को विपक्ष ने व्यंग्यात्मक रूप से ‘जी राम जी’ बिल कहना शुरू कर दिया और इसे महात्मा गांधी के नाम और उनकी विरासत पर सीधा हमला बताया।
बिल के पास होते ही विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि सरकार जानबूझकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) से महात्मा गांधी का नाम हटाकर न केवल गांधी जी का अपमान कर रही है, बल्कि ग्रामीण गरीबों को मिलने वाले काम के कानूनी अधिकार को भी कमज़ोर कर रही है। विरोध में सांसदों ने सदन के वेल में उतरकर नारेबाज़ी की, बिल की प्रतियां फाड़ीं और उन्हें स्पीकर की कुर्सी की ओर उछाल दिया। इससे पहले दिन में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर के भीतर विरोध मार्च भी निकाला और सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की।
दिल्ली: लोकसभा से पास हुआ ‘जी राम जी’ बिल पास। सदन में विधेयक की कॉपी फाड़ी गई। चर्चा के दौरान हंगामा और विरोध की झलक।@BJP4India #LokSabha #JiRamJiBill #Parliament pic.twitter.com/aMgnBi3k2e
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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने लोकसभा में कहा कि NREGA में महात्मा गांधी का नाम 2009 के आम चुनावों को ध्यान में रखकर जोड़ा गया था, और उस समय यह फैसला राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लिया गया था। उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की उस टिप्पणी पर भी पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार अपनी मर्ज़ी से योजनाओं के नाम बदलती रहती है। चौहान ने इसके जवाब में नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर चल रही कई सरकारी योजनाओं का ज़िक्र किया।
लोकसभा में विरोध के बीच ‘जी राम जी’ बिल पास#LokSabha #JiRamJiBill #Parliament pic.twitter.com/DD1ezgdkzB
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इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस कानून को महात्मा गांधी का अपमान और काम के अधिकार पर सीधा हमला बताया। खड़गे ने कहा कि MGNREGA ने ग्रामीण भारत में सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, और इस कानून को कमजोर करना करोड़ों ग्रामीण परिवारों के हितों के खिलाफ है।
नए ‘जी राम जी’ बिल के तहत यह प्रावधान किया गया है कि हर ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य बिना किसी विशेष कौशल के शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों, उन्हें हर साल 125 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। इसके अलावा, राज्यों को निर्देश दिया गया है कि कानून लागू होने के छह महीने के भीतर वे अपनी मौजूदा योजनाओं को इस नए कानून के प्रावधानों के अनुरूप ढालें।
कुल मिलाकर, यह बिल न केवल संसद में तीखे राजनीतिक टकराव का कारण बना, बल्कि महात्मा गांधी की विरासत, ग्रामीण रोज़गार और सरकार की नीतियों को लेकर एक बड़े राष्ट्रीय विवाद की शक्ल भी ले चुका है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर