डेली24 भारत डेस्क: केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम को बदलकर “VB-जी राम जी योजना” करने के लिए लोकसभा में पेश किए गए बिल को लेकर संसद में बहस तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और इसे न केवल महात्मा गांधी के प्रति अपमानजनक करार दिया है, बल्कि इसे राज्यों और ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ भी बताया है.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संसद में कहा कि सरकार की योजना का नाम बदलने की यह सनक समझ में नहीं आती. उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार के अधिकार तो बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन योजना की फंडिंग घटाई जा रही है. उन्होंने बताया कि मजदूरों के लिए उपलब्ध 100 दिन के रोजगार को 125 दिन करने का प्रस्ताव है, लेकिन मजदूरी दर बढ़ाने पर कोई प्रावधान नहीं है.
प्रियंका गांधी ने महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाए जाने की भी तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी मेरे परिवार के सदस्य नहीं थे, लेकिन परिवार के मेंबर जैसे ही थे. किसी एक व्यक्ति की सनक के आधार पर किसी योजना में बदलाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल को पहले संसद में पूरी तरह से बहस के लिए लाया जाना चाहिए और फिर जरूरी सुझावों को शामिल कर नया विधेयक पेश किया जाए.
“योजनाओं के नाम बदलने की सनक मुझे समझ नहीं आती”- कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा@INCIndia @priyankagandhi #PriyankaGandhi #Congress pic.twitter.com/8BXmbFdAY7
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) December 16, 2025
बीजेपी के प्रस्ताव पर विरोध!
इस विधेयक को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेश किया, जिस पर बहस जारी है. हालांकि बीजेपी सांसदों ने इसका बचाव किया, विपक्षी नेताओं ने इसे किसानों और राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला बताया. टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि भगवान राम पूजनीय हैं, लेकिन महात्मा गांधी इस वक्त ज्यादा प्रासंगिक हैं. उनका कहना था कि नए विधेयक के अनुसार अब राज्यों पर योजना की फंडिंग का 40 फीसदी बोझ आएगा, जबकि पहले यह मात्र 10 फीसदी थी.
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का विरोध!
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को ऐसे मंत्री के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने महात्मा गांधी का नाम हटा दिया. इसे उन्होंने गलत और अपमानजनक बताया. इसके अलावा, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी कहा कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना सीधे तौर पर उनके प्रति अपमान है.
प्रियंका गांधी ने संसद से आग्रह किया कि यह विधेयक स्टैंडिंग कमेटी में भेजा जाए और सभी जरूरी सुझावों को शामिल करने के बाद इसे पुनः सदन में पेश किया जाए. उनका यह भी मानना है कि इस तरह की योजनाओं में किसी भी व्यक्तिगत प्राथमिकता या सनक के आधार पर बदलाव नहीं होना चाहिए.
मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है, उसका नाम बदलना केवल प्रतीकात्मक विवाद नहीं है, बल्कि इसके क्रियान्वयन और फंडिंग पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है. संसद में चल रही बहस इस बात को दर्शाती है कि किसी भी बड़े सुधार या बदलाव को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और सभी हितधारकों की राय लेना आवश्यक है. महात्मा गांधी के योगदान को नजरअंदाज किए बिना योजनाओं का नाम बदलना न केवल उनके प्रति असम्मान है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील मुद्दा है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर