डेली24भारत डेस्क: केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कई अहम फैसले लिए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रोजगार, ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े कानूनों को मंजूरी दी है, जिनका सीधा असर आम नागरिकों और खासतौर पर ग्रामीण आबादी पर पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य इन सुधारों के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और सामाजिक सुरक्षा को व्यापक बनाना है।
इन फैसलों में सबसे बड़ा बदलाव ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से जुड़ा है। सरकार जल्द ही संसद में एक नया विधेयक पेश करेगी, जिसके तहत मनरेगा की जगह पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी बिल लाया जाएगा। इस नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी, जबकि अभी यह सीमा 100 दिन की है। इसके लिए केंद्र सरकार करीब 95,600 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण आय बढ़ेगी, बेरोजगारी कम होगी और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम के ज्यादा अवसर मिलेंगे।
यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल लंबे समय से मनरेगा को अपनी प्रमुख उपलब्धि बताते रहे हैं और केंद्र सरकार पर पर्याप्त फंड न देने के आरोप लगाते रहे हैं। अब रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाने और नई व्यवस्था लाने से सरकार इन आरोपों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में, जहां इस योजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है, यह फैसला नई बहस को जन्म दे सकता है।
नाम बदलने के साथ-साथ योजना के स्वरूप में भी बदलाव किया गया है। नए कानून के तहत सभी परियोजनाएं विकसित भारत के राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा ढांचे के अंतर्गत होंगी और पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान के अनुसार तैयार की जाएंगी। इनमें जल संरक्षण, पानी की उपलब्धता और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए काम की योजना कम से कम 60 दिन पहले तैयार की जाए। अगर किसी परिवार को समय पर रोजगार नहीं मिलता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान होगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि 25 अतिरिक्त दिनों का रोजगार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा। इससे लोगों की आमदनी बढ़ेगी, खर्च करने की क्षमता में इजाफा होगा और स्थानीय बाजारों को मजबूती मिलेगी। रोजगार के नए अवसर पैदा होने से गांवों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी।
इनके अलावा सरकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाने जा रही है। शांति बिल के जरिए निजी और विदेशी कंपनियों को सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में काम करने की अनुमति दी जाएगी। इससे देश की ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी और तकनीक व निवेश के नए अवसर सामने आएंगे।
बीमा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। अब इसमें 100 प्रतिशत तक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति होगी। सरकार का मानना है कि इससे बीमा कंपनियों को अधिक पूंजी मिलेगी, सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी और ज्यादा लोगों को जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति से जुड़ी बीमा सुरक्षा मिल सकेगी। कुल मिलाकर, सरकार इन फैसलों को आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देख रही है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर