डेली24भारत डेस्क: लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा आयोजित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि यह गीत सिर्फ साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि उस दौर में इंग्लैंड की सत्ता को खुली चुनौती देने वाली आवाज़ था। आज़ादी के आंदोलन के समय यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों की शक्ति, साहस और संकल्प का स्रोत बनकर उनके मनोबल को बढ़ाता रहा।
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, महात्मा गांधी भी इस गीत से गहराई से जुड़े हुए थे। उनके लिए वंदे मातरम् केवल भावनाओं का गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा था। गांधी ने इसे इतना सम्मान दिया कि वे इसे राष्ट्रगान के रूप में देखने की इच्छा रखते थे।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सवाल उठाया कि पिछले सौ वर्षों में वंदे मातरम् के साथ क्या-क्या अन्याय किए गए और क्यों। उनके अनुसार कुछ ऐसी राजनीतिक ताकतें थीं जिन्होंने इस गीत की प्रतिष्ठा को धूमिल किया, और वे ताकतें महात्मा गांधी जैसी महान हस्ती की भावना पर भी भारी पड़ गईं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 15 अक्टूबर 1936 को मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ में वंदे मातरम् के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उनका दावा था कि इसके कुछ शब्द मुस्लिम समुदाय को आपत्तिजनक लगते हैं। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग की आलोचना करने की बजाय स्वयं इस गीत पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
उन्होंने कहा कि जिन्ना के विरोध के बाद नेहरू को अपना राजनीतिक आधार और नेतृत्व खतरे में दिखने लगा। इस डर से कांग्रेस ने वंदे मातरम् की समीक्षा करने का निर्णय लिया और गीत के कुछ अंश हटाए। मोदी ने कहा कि यह निर्णय मुस्लिम लीग के दबाव में लिया गया और इस तरह गीत के साथ अन्याय हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने गीत की रचना और इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बंकिमचंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875, अक्षय नवमी के दिन वंदे मातरम् की रचना की थी। यह 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ के साथ पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे मंच पर गाकर पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया। गीत की धुन ने वहां मौजूद हजारों लोगों को भावुक कर दिया था।
चर्चा में कांग्रेस की ओर से गौरव गोगोई ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण में ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उनके राजनीतिक पूर्वज भी अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे हों। गोगोई का आरोप था कि इस पूरे संवाद का उद्देश्य ऐतिहासिक तथ्यों को नया रूप देना और चर्चा को राजनीतिक दिशा देना था।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी प्रधानमंत्री किसी मुद्दे पर बोलते हैं, वह अक्सर कांग्रेस और नेहरू का नाम बार-बार लेते हैं। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में मोदी ने 50 बार कांग्रेस और 14 बार नेहरू का नाम लिया। 2022 के राष्ट्रपति अभिभाषण पर संयोजन में उन्होंने 15 बार और 2020 में 20 बार नेहरू को उद्धृत किया। गोगोई का कहना था कि चाहे कितने प्रयास किए जाएं, नेहरू के योगदान को बदनाम नहीं किया जा सकता।
आज की बहस में प्रधानमंत्री के बाद कांग्रेस की ओर से गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी मुख्य वक्ताओं के रूप में मौजूद हैं। वंदे मातरम् पर यह चर्चा लगभग दस घंटे तक चलने की संभावना है, यानी सोमवार को संसद देर रात तक चल सकती है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर