डेली24 भारत डेस्क: बॉलीवुड के सदाबहार ही-मैन धर्मेंद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे. 24 नवंबर को 89 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, और उनकी विदाई ने पूरे देश और फिल्म जगत को गहरे शोक में डुबो दिया. देओल परिवार ने हरिद्वार में पूर्ण विधि-विधान के साथ उनका अस्थि विसर्जन किया-एक ऐसा क्षण जो हर किसी की आँखें नम कर गया. हरिद्वार के पिलिभीत हाउस गंगा नदी के किनारे स्थित लगभग 100 साल पुरानी हवेली में परिवार ने दिवंगत अभिनेता की अस्थियां रखी थी. इसी ऐतिहासिक स्थान से परिवार सुबह-सुबह वीआईपी घाट तक पहुंचा. गंगा तट पर पहुंचने के बाद परिवार ने पंडितों की मंत्रोच्चारण के बीच सभी रीति-रिवाज पूरे किए. पोते करण देओल ने अपने दादा की अस्थियां गंगा में प्रवाहित की. सनी देओल और बॉबी देओल उन्हें थामे, संभालते और ढाढ़स देते दिखाई दिए. परिवार के सभी सदस्य सफेद कपड़े में, बेहद भावुक अवस्था में नजर आए. अस्थि विसर्जन के बाद परिवार तुरंत होटल लौटा और फिर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गया. वीडियो में कई बार देखा गया कि सनी-बॉबी और करण एक-दूसरे को गले लगाकर सहारा दे रहे थे. यह दृश्य न सिर्फ एक परिवार के दुख को दिखाता है, बल्कि उस विशाल शख्सियत की कमी भी, जिसे पूरी दुनिया ने दशकों तक प्यार किया. धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार मुंबई के विले पार्ले श्मशान घाट पर शांत और बेहद निजी तरीके से किया गया था. मीडिया को दूर रखा गया, और केवल परिवार के सदस्य ही उपस्थित थे.
धर्मेंद्र के निधन के बाद मुंबई में दो अलग-अलग प्रार्थना सभाएँ रखी गई. एक सनी और बॉबी देओल की तरफ से, जो उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर के बेटे हैं. दूसरी हेमा मालिनी और उनकी बेटियाँ ईशा और अहाना देओल की तरफ से. इन सभाओं में देशभर की फ़िल्मी हस्तियाँ एकजुट होकर धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि देने पहुंची. उनके जीवन, उनके व्यक्तित्व और उनकी विनम्रता की कई कहानियाँ सोशल मीडिया पर साझा की गई.
दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की अस्थियां विसर्जित करते हुए रो पड़े बॉबी देओल। परिवार ने भावुक माहौल में की अंतिम रस्में। अस्थि विसर्जन के दौरान फूट-फूटकर रोए बॉबी देओल। #Dharmendra #BobbyDeol #AsthiVisarjan pic.twitter.com/GMTU63qZHy
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) December 3, 2025
धर्मेंद्र सिर्फ एक्शन स्टार नहीं थे. वे रोमांस के किंग भी थे, भावनाओं के शहंशाह भी, और जनता के सबसे प्रिय अभिनेता भी. ‘शोले’, ‘धरम वीर’, ‘सीता और गीता’, ‘चुपके चुपके’, ‘अनुपमा’- जैसे अनगिनत क्लासिक फिल्मों से उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी. उनकी मुस्कान में सादगी थी, स्वभाव में नम्रता थी, और अदाकारी में जादू था.
गंगा की पवित्र धारा में बहती उन अस्थियों के साथ, एक महान कलाकार और एक शानदार इंसान की भौतिक उपस्थिति जरूर समाप्त हो गई, लेकिन धर्मेंद्र हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे, अपने काम से, अपने स्वभाव से और अपने अपार प्रेम से, भारतीय सिनेमा उन्हें हमेशा याद रखेगा.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर