Daily 24 भारत डेस्क: अजमेर के दरगाह में जियारत करने वाले खादिमों के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है. जिसके बाद दरगाह कमेटी के इस निर्णय के आने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. अंजुमन सैयद जादगान के लिए आए लाइसेंस के फरमान पर सचिव चिश्ती ने इसको तुगलकी फरमान बताया और नाजिम पर गंभीर आरोप लगाए साथ ही इसको रद्द करने की मांग की.
केंद्र सरकार और कोर्ट के आए आदेशों के अनुशार लागू की जा रही इस नई व्यवस्था के खिलाफ विवाद खड़ा कर दिया गया है. इसको लेकर अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने विरोध प्रदर्शन किया. सरवर चिश्ती ने इस फैसले को तुगलकी फरमान बताया. और कहा कि इस आदेश को खादिम समाज जरा भी स्वीकर नहीं करेगा.
बताया जा रहा है कि 1 दिसंबर से विज्ञापन जारी किया गया और लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. जिसका चलन दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने किया. इस प्रक्रिया की अंतिम तिथि 5 जनवरी 2026 तय की गई है. जिसके चलते नाजिम का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से कोर्ट नियमों के अनुरूप है. साथ ही इसमें केंद्रिय प्रक्रियाओं और कोर्ट के निर्देशों का पालन है. उन्होंने कहा कि इससे किसी का भी हित प्रभावित नहीं होगा. वहीं दूसरी तरफ जैसे ही आदेश लागू हुआ दरगाह में विरोध की लहर दौड़ने लगी. जिसके बाद आदेश के विरोध में बैठके हुईं. जहां पर सैयद सरवर चिश्ती ने नाजिर पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि नाजिम की नियुक्ति अवैध हुई है. जिसके साथ दरगाह कमेटी का अस्तित्व भी संदेह के घेरे में लिया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि नाजिम ने खादिम समाज को अपमानित करने की कोशिश की है और बिना संवाद के फरमान को लागू किया है. अभी यह तुगलकी आदेश नहीं माना जाएगा.
नाजिम का आरोप हर साल जानबूझकर जारी करते हैं आदेश
सचिव चिश्ती ने यह भी आरोप लगाया कि उर्स से पहले हर साल जानबूझकर ऐसे आदेशों को जारी किया जाता है. जिससे व्यवस्थाओं में बाधाएं सामने आएं. ” उर्स आने वाला और अब नया बखेड़ा खड़ा कर दिया गया है. हमारा खादिम समुदाय कमजोर नहीं है, जिसको हल्के में लेना बड़ी भूल होगी. वहीं दूसरी तरफ कलेक्टर लोकबंधु एसपी वंदिता राणा व अन्य अधिकारियों ने चिश्ती की शिकायतें सुनी और उर्स व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया.
सचिव चिश्ती ने प्रशासन से नाजिम पर कार्रवाई की मांग की. साथ ही कहा कि वहां कि दरगाह कमेटी मनमर्जी चलाने की कोशिश कर रही है. जबकि मंत्रालय से लेकर नियमों तक कहीं भी इस फरमान का उल्लेख नहीं है. लाइसेंस को लेकर शुरू हुआ यह विवाद उर्स से पहले बड़ा मुद्दा बन चुका है.