Daily 24 भारत डेस्क: वाराणसी में निजी स्कूलों में किताबों के नाम पर कमीशनखोरी, महंगी यूनिफॉर्म और मनमानी फीस वसूली के खिलाफ चलाए गए अभियान का असर अब साफ तौर पर नजर आने लगा है. जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में इन मुद्दों को गंभीरता से उठाया गया और स्पष्ट संदेश दिया गया कि नियमों से बाहर जाकर वसूली करने वाले विद्यालयों को बख्शा नहीं जाएगा. प्रशासन ने साफ किया कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
बैठक में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अधिनियम, 2018 के तहत निजी स्कूलों की फीस संरचना की गहन समीक्षा की गई. जिलाधिकारी ने सभी स्कूलों को पिछले तीन वर्षों की फीस का पूरा ब्योरा और ऑडिटेड वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फीस में की गई बढ़ोतरी तय नियमों और मानकों के अनुरूप हो. प्रशासन का यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
फीस, यूनिफॉर्म और किताबों पर सख्ती: अभिभावकों को राहत की उम्मीद
जिलाधिकारी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने, किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर अतिरिक्त बोझ डालने या किसी एक दुकान से खरीद के लिए बाध्य करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने के साथ-साथ अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए जाएंगे. साथ ही, यह भी तय किया गया कि कोई भी विद्यालय पांच वर्षों के भीतर यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेगा, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक खर्च का दबाव न पड़े.
अभिभावकों की शिकायतों को सीधे दर्ज कराने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. यहां प्राप्त शिकायतों की गोपनीयता बनाए रखते हुए जांच की जाएगी और दोषी विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई होगी. इसके अलावा, समिति समय-समय पर औचक निरीक्षण कर अभिभावकों और छात्रों से फीडबैक भी लेगी.प्रशासन का कहना है कि ‘किताबों के बहाने कमीशन का खेल’ जैसे मामलों को गंभीरता से लिया गया है और इसी के चलते यह सख्ती की जा रही है, ताकि छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके.