Daily 24 भारत डेस्क: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से पेश किया गया था, विपक्ष की एकजुटता के चलते पारित नहीं हो सका. इस घटनाक्रम ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को विधायी मोर्चे पर बड़ा झटका दिया है.
विधेयक के समर्थन में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया. हालांकि, इसे पारित होने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई यानी कम से कम 352 वोटों की आवश्यकता थी. आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण यह प्रस्ताव गिर गया.
प्रियंका गांधी का केंद्र पर तीखा हमला- “महिलाएं मूर्ख नहीं, गुमराह करना बंद करें”। सरकार की नीतियों पर साधा निशाना। महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर उठाए सवाल।@priyankagandhi @INCIndia #PriyankaGandhi #Congress #WomenEmpowerment pic.twitter.com/3BNlWG8aTi
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) April 18, 2026
बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि यह विधेयक दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को कम करने की एक रणनीति है और राजनीतिक नक्शे को सत्तारूढ़ दल के पक्ष में ढालने की कोशिश की जा रही है. साथ ही, विपक्ष ने इसे जाति जनगणना में देरी करने की चाल भी बताया.
मतदान से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से “अंतरात्मा की आवाज” पर वोट करने की अपील की थी, लेकिन विपक्ष ने इसे खारिज कर दिया. वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने एक संशोधन प्रस्ताव रखा, जिसमें सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50% तक बढ़ाने की बात कही गई थी. इसके बावजूद विपक्ष ने अपना रुख नहीं बदला. विधेयक के गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने घोषणा की कि इस मुख्य प्रस्ताव से जुड़े दो अन्य विधेयकों को भी वापस लिया जाएगा, जिनमें एक परिसीमन से संबंधित था.
यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को संसद में किसी विधेयक पर सीधी हार का सामना करना पड़ा है. इससे पहले 2021 में सरकार को कृषि कानूनों को भी व्यापक विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था.इस पूरे घटनाक्रम ने आगामी राजनीतिक रणनीतियों और संसद में सरकार-विपक्ष के समीकरणों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.