डेली24 भारत डेस्क: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को देश के आधुनिकतम और तेज रफ्तार राजमार्गों में से एक माना जा रहा है. इस कॉरिडोर का उद्देश्य दिल्ली और उत्तराखंड के बीच यात्रा समय को कम करना और यातायात को अधिक सुगम बनाना है. लेकिन इसी आधुनिकता के साथ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कई सख्त नियम लागू किए हैं, जिनका सीधा असर आम यात्रियों और स्थानीय लोगों पर पड़ रहा है.
हाल ही में जारी आदेश के अनुसार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बाइक, ऑटो और ट्रैक्टर जैसे धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. यह निर्णय सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के वाहन हाई-स्पीड कॉरिडोर पर चलने के लिए उपयुक्त नहीं हैं और इनकी वजह से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है.
इस फैसले से विशेष रूप से बागपत और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि रोजमर्रा के आवागमन में इन वाहनों का व्यापक उपयोग होता है. इससे पहले खेकड़ा-अक्षरधाम एलिवेटेड हाईवे पर भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू किया गया था, जिसमें दोपहिया, तिपहिया और ट्रैक्टरों को नो एंट्री दी गई थी. अब इस नियम का विस्तार पूरे कॉरिडोर तक कर दिया गया है.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बाइक-ऑटो-ट्रैक्टर दौड़ाए तो भरना पड़ेगा तगड़ा जुर्माना!@NHAI_Official #DelhiDehradunExpressway #NHAI #TrafficRules pic.twitter.com/TUcheKOhR7
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) April 17, 2026
एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 2002 की धारा 35 के तहत यह निर्णय लागू किया है. अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्ष और चालू वर्ष में हुए सड़क हादसों के विश्लेषण से यह सामने आया कि अधिकांश दुर्घटनाओं में धीमी गति के वाहन और ऑटो शामिल थे, जिनमें कई लोगों की जान भी गई और कई गंभीर रूप से घायल हुए.
नई व्यवस्था के तहत केवल कार, बस और ट्रक जैसे तेज गति वाले वाहनों को ही कॉरिडोर पर चलने की अनुमति दी गई है. इसके साथ ही वाहनों की अधिकतम गति सीमा भी तय कर दी गई है. कारों के लिए अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा और ट्रकों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है. यदि कोई वाहन इन सीमाओं का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ स्वतः चालान की कार्रवाई की जाएगी.
इसके लिए हाईवे पर आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लगाई गई है, जिसमें स्पीड डिटेक्शन सिस्टम, एएनपीआर कैमरे, और इन्सिडेंट डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं. ये कैमरे न केवल तेज गति को पकड़ते हैं, बल्कि बिना सीट बेल्ट लगाए वाहन चलाने या नाबालिग के ड्राइविंग जैसे उल्लंघनों को भी स्वतः दर्ज कर लेते हैं.
इसके अलावा हाईवे पर रडार आधारित निगरानी प्रणाली भी स्थापित की गई है, जिससे किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत नियंत्रण कक्ष तक पहुंच जाती है. यहां तक कि आपातकालीन परिस्थितियों में हवाई निगरानी को भी संभव बनाने के लिए विशेष रडार सिस्टम लगाए गए हैं. हाल ही में बागपत के बिजरौल गांव के पास इस कॉरिडोर पर एक सड़क दुर्घटना भी सामने आई, जिसमें तीन वाहन आपस में टकरा गए. इस हादसे में दो बच्चों सहित कुल छह लोग घायल हो गए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक वाहन के टकराने के बाद पीछे से आ रहे अन्य वाहन भी आपस में भिड़ गए, जिससे स्थिति गंभीर हो गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया और यातायात को फिर से सामान्य कराया.
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तेज रफ्तार वाले हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और नियमों का पालन कितना जरूरी है. प्रशासन का मानना है कि नए प्रतिबंध और तकनीकी निगरानी से भविष्य में इस तरह की घटनाओं में कमी आएगी.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भारत के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसकी सफलता केवल गति पर नहीं, बल्कि सुरक्षा पर भी निर्भर करती है. बाइक, ऑटो और ट्रैक्टर जैसे वाहनों पर प्रतिबंध और सख्त स्पीड लिमिट इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं. हालांकि यह निर्णय कुछ लोगों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है, लेकिन लंबे समय में यह सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करेगा. सही नियमों और तकनीकी निगरानी के साथ यह कॉरिडोर वास्तव में सुरक्षित और प्रभावी यातायात प्रणाली का उदाहरण बन सकता है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर