डेली24 भारत डेस्क: पंजाब का मालवा क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है, जिसने न केवल लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है, बल्कि सामाजिक ढांचे को भी झकझोर कर रख दिया है. Malwa region के कई गांवों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उन्हें अब “विधवाओं का गांव” कहा जाने लगा है. खासकर Bathinda जिले के गांवों में कैंसर ने ऐसा कहर बरपाया है कि कई परिवारों में पुरुषों की संख्या बेहद कम रह गई है, और कुछ गलियां तो “विधवाओं की गली” के नाम से जानी जाती हैं.
यह समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है. Jajjal, Rama Mandi, Chathewala और Giana जैसे कई गांव इस त्रासदी की चपेट में हैं. ये सभी इलाके पंजाब के कुख्यात “कैंसर बेल्ट” का हिस्सा माने जाते हैं, जहां कैंसर के मामलों की संख्या असामान्य रूप से अधिक है.
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो दशकों में इन गांवों में हजारों लोगों की मौत कैंसर से हो चुकी है. स्थिति इतनी भयावह है कि लगभग हर घर में एक या उससे अधिक कैंसर मरीज मिल जाएंगे. यह केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट बन चुका है, जो पूरे समुदाय को प्रभावित कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है की इस गंभीर स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण दूषित पानी है. इलाके के भूजल में आर्सेनिक, सेलेनियम और यूरेनियम जैसे खतरनाक तत्व उच्च मात्रा में पाए गए हैं. इसके अलावा, खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी और फसलों को भी जहरीला बना दिया है. लंबे समय तक इन तत्वों के संपर्क में रहने से कैंसर जैसी घातक बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
औद्योगिक प्रदूषण ने भी इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। क्षेत्र में स्थित रिफाइनरी प्लांट से निकलने वाला कचरा पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है. इसके साथ ही तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब के बढ़ते सेवन ने भी कैंसर के मामलों में वृद्धि की है. यानी यह संकट कई कारणों का संयुक्त परिणाम है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हालांकि, हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं. AIIMS Bathinda जैसे संस्थानों की स्थापना से इलाज की सुविधाएं बेहतर हुई हैं. यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा, मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत मरीजों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे गरीब परिवारों को कुछ राहत मिल रही है.
फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इलाज से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है. इसके लिए जड़ से सुधार की जरूरत है, जैसे स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, कीटनाशकों और रासायनिक खादों के उपयोग पर नियंत्रण, और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना. जब तक इन मूल कारणों पर काम नहीं किया जाएगा, तब तक यह संकट पूरी तरह खत्म नहीं हो पाएगा. पंजाब का यह “कैंसर बेल्ट” हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि विकास और औद्योगिकीकरण के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य की अनदेखी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है. यह केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है की समय रहते सही कदम उठाना कितना जरूरी है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर