डेली24 भारत डेस्क: रूस ने हाल ही में अपने इंटरनेट पर नियंत्रण को और सख्त करते हुए अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमुख सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी है. पुतिन सरकार का यह कदम टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने के बाद उठाया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि देश की डिजिटल नीति में विदेशी प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को सीमित करने की दिशा में नया प्रयास किया जा रहा है.
बुधवार को रूस की नियामक संस्था रोसकोमनाडजोर ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया। अधिकारियों का कहना है कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गुमनाम तरीके से जानकारी साझा करने और सरकार की निगरानी से बचने के लिए किया जा रहा था. टेलीग्राम पर प्रतिबंध के बाद, रूस ने अब वॉट्सऐप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी ब्लॉक कर दिया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को भी निशाना बनाया है. इनमें बीबीसी, डॉयचे वेले, रेडियो फ्री यूरोप और रेडियो लिबर्टी जैसी प्रमुख वेबसाइटें शामिल हैं. इसके अलावा, टॉर ब्राउज़र को भी ब्लॉक किया गया है, जो यूजर्स को गुमनाम रूप से इंटरनेट ब्राउज़ करने की सुविधा देता है.
रूस की अमेरिकी सोशल मीडिया पर बड़ी कार्रवाई, वॉट्सऐप, फेसबुक, यूट्यूब पर रोक@KremlinRussia_E #Russia #VladimirPutin #SocialMediaBan pic.twitter.com/dn8a7SKb8f
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) February 12, 2026
रूस में इंटरनेट सेवा देने वाले प्रदाताओं के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे देश के राष्ट्रीय डोमेन नाम सिस्टम का इस्तेमाल करें. यह सिस्टम रोसकोमनाडजोर की निगरानी में काम करता है और “सॉवरेन इंटरनेट” कानून के तहत इंटरनेट को नियंत्रित करने का उपकरण है. इस प्रणाली का उद्देश्य देश में इंटरनेट की पहुंच और सामग्री को नियंत्रित करना है, ताकि विदेशी प्लेटफॉर्म्स और मीडिया की पहुंच सीमित हो सके. विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन सरकार का यह कदम विदेशी सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कम करने और नागरिकों को घरेलू डिजिटल सेवाओं की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया गया है. हालांकि, इस कदम के चलते रूस में रहने वाले लोग वैश्विक सूचना स्रोतों और डिजिटल कम्युनिकेशन से कट गए हैं.
रूस में पहले से ही कुछ वैश्विक प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लग चुका है. उदाहरण के लिए, वॉट्सऐप और टेलीग्राम की कॉलिंग फीचर पर पहले ही रोक लगा दी गई थी. इसके अलावा, दिसंबर में एप्पल के फेसटाइम और स्नैपचैट को भी रूस में बैन किया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रतिबंधों का व्यापक प्रभाव नागरिकों की दैनिक डिजिटल जीवन शैली पर पड़ा है, क्योंकि वे अब लोकप्रिय वैश्विक संचार और सूचना सेवाओं तक सीधे पहुंच नहीं पा रहे.सरकार का यह कदम इंटरनेट की स्वतंत्रता और सूचना की स्वतंत्रता पर व्यापक प्रभाव डालता है. नागरिक अब घरेलू और सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हो रहे हैं, और वैश्विक डिजिटल संवाद से दूरी बनाना उनके लिए अनिवार्य हो गया है. साथ ही, इससे रूस में सूचना का केंद्रीकरण और सुरक्षा पर जोर बढ़ा है.
रूस का यह नया इंटरनेट नीति कदम स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि पुतिन सरकार डिजिटल नियंत्रण और सूचना सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध न केवल नागरिकों की सूचना तक पहुंच को सीमित करते हैं, बल्कि रूस के डिजिटल परिदृश्य को भी पूरी तरह से राष्ट्रीय और नियंत्रित नेटवर्क की ओर मोड़ रहे हैं. इस बदलाव से यह स्पष्ट होता है की भविष्य में रूस का इंटरनेट अधिक केंद्रीकृत और राज्य-नियंत्रित होगा, जबकि वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका काफी कम हो जाएगी.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर