Daily 24 भारत डेस्क: अंतरिक्ष की दुनिया में भारत की जड़ों को गर्व से पहचान दिलाने वाली नासा की स्टार एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने 27 साल की शानदार सेवा के बाद अपने अंतरिक्ष करियर को अलविदा कह दिया है. दिसंबर के आखिर में उनका रिटायरमेंट आधिकारिक रूप से लागू हो गया. साहस, समर्पण और भारतीय संस्कारों की मिसाल रहीं सुनीता विलियम्स की कहानी बेहद खास है.
नासा की सबसे चर्चित अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल सुनीता विलियम्स अब आधिकारिक तौर पर रिटायर हो चुकी हैं. 60 साल की उम्र में उन्होंने 27 साल लंबा अंतरिक्ष करियर पूरा किया, जिसमें उन्होंने तीन स्पेस मिशन किए और कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए. सुनीता विलियम्स हाल ही में उस मिशन से पृथ्वी पर लौटी थीं, जो सिर्फ एक हफ्ते का होना था, लेकिन तकनीकी खराबियों के कारण नौ महीने से ज्यादा लंबा खिंच गया. बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल में खराबी के चलते वे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर फंसी रहीं और आखिरकार मार्च में स्पेसएक्स के यान से सुरक्षित वापसी कर सकीं.
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— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 21, 2026
इस चुनौतीपूर्ण मिशन के दौरान भी सुनीता विलियम्स ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने शून्य गुरुत्वाकर्षण में पौधे उगाने का सफल प्रयोग किया और ‘प्लांट हैबिटेट-07’ प्रोजेक्ट के तहत रोमेन लेट्यूस उगाकर विज्ञान की दुनिया में नई उपलब्धि जोड़ी. सुनीता विलियम्स न सिर्फ एक बेहतरीन वैज्ञानिक रहीं, बल्कि उन्होंने अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति को भी जीवित रखा. वे अपने साथ समोसे, भगवद्गीता, उपनिषद, ओम का प्रतीक, भगवान शिव की तस्वीर और भगवान गणेश की मूर्ति तक अंतरिक्ष में ले गईं.
अमेरिका के ओहायो में जन्मी सुनीता विलियम्स के पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे. यही वजह है कि भारतीय संस्कार उनके जीवन और सोच का अहम हिस्सा रहे. अपने करियर में उन्होंने 9 बार स्पेसवॉक किया और 62 घंटे से ज्यादा समय अंतरिक्ष में बाहर बिताया, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री में सबसे अधिक है. नासा के नए एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइज़कमैन ने उन्हें मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए प्रेरणा बताया है. सुनीता विलियम्स की रिटायरमेंट के साथ एक युग का अंत जरूर हुआ है, लेकिन उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी.अंतरिक्ष से लेकर धरती तक, साहस और संस्कार की पहचान बन चुकी सुनीता विलियम्स को सलाम.