डेली24भारत डेस्क: यह विचार कि नदियों की भी एक जीवन–यात्रा होती है—जन्म, युवावस्था, बदलाव और कभी-कभी अंत—फिंके नदी के मामले में जैसे ठहर-सा जाता है। समय जिन चीज़ों को मिटा देता है, उन्हें यह नदी मानो चुपचाप सहती हुई आज भी थामे हुए है। ऑस्ट्रेलिया की यह रहस्यमयी नदी, जिसे स्थानीय अर्रेंटे लोग लारापिंटा कहते हैं, लगभग 30 से 40 करोड़ वर्ष पुरानी मानी जाती है। यह वह दौर था जब धरती पर डायनासोर भी नहीं आए थे, जब महाद्वीप अलग-अलग दिशाओं में खिसक रहे थे और दुनिया का नक्शा आज जैसा बिल्कुल नहीं था।
फिंके नदी को अक्सर देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि यह दुनिया की सबसे प्राचीन नदियों में से एक है। साल के अधिकतर समय यह नदी बहती हुई धारा नहीं, बल्कि रेत से भरी चौड़ी घाटी और उसमें जगह-जगह बने छोटे पानी के गड्ढों जैसी दिखाई देती है। पर जब मध्य ऑस्ट्रेलिया में बारिश होती है, तो यही सूनी-सी घाटी अचानक जीवंत हो उठती है—पानी तेज़ी से बहता है, किनारे हरे हो जाते हैं और लगता है जैसे धरती अपनी पुरानी यादें फिर से जी रही हो।
यह नदी मैक्डोनेल रेंज से निकलती है, जो एलिस स्प्रिंग्स के पश्चिम में स्थित है। वहां से यह दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ते हुए ऑस्ट्रेलिया के कठोर और शुष्क दिल को चीरती हुई सिम्पसन डेज़र्ट की रेत में विलीन हो जाती है। रास्ते भर यह पहाड़ों, घाटियों और चट्टानों को काटती-छांटती रही है—करोड़ों सालों तक—और यही कारण है कि इसके आसपास की घाटियां और चट्टानी संरचनाएं भूवैज्ञानिकों के लिए किसी खुली किताब से कम नहीं हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि फिंके नदी की खास बात यह नहीं कि इसमें हमेशा पानी बहता रहा, बल्कि यह है कि इसका मार्ग लाखों वर्षों से लगभग वैसा ही बना हुआ है। धरती के बड़े-बड़े बदलावों—महाद्वीपीय बहाव, जलवायु परिवर्तन, महासागरों के फैलने-सिकुड़ने, और कई बार हुई सामूहिक विलुप्तियों—के बावजूद इस नदी ने अपने रास्ते को नहीं छोड़ा। यही वजह है कि इसे “सबसे पुरानी नदी प्रणालियों में से एक” कहा जाता है।
फिंके नदी केवल भूविज्ञान की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानव संस्कृति के लिहाज़ से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिमी अर्रेंटे लोग इसे अपना पवित्र जीवन-स्रोत मानते हैं। उनकी कहानियों, गीतों और परंपराओं में लारापिंटा का जिक्र बार-बार आता है। हजारों सालों से लोग इसके पानी, इसके किनारों और इसके आसपास की धरती पर निर्भर रहे हैं, इसलिए यह नदी उनके लिए केवल एक प्राकृतिक संरचना नहीं, बल्कि एक जीवित विरासत है।
हालांकि वैज्ञानिक पूरी निश्चितता से “दुनिया की सबसे पुरानी नदी” का तमगा देने में सावधानी बरतते हैं—क्योंकि नील, सिंधु और अमेरिका की न्यू रिवर जैसी नदियां भी बेहद प्राचीन हैं—फिर भी फिंके को जो बात अलग बनाती है, वह है इसका अद्भुत स्थायित्व। यह नदी समय की सबसे कठोर परीक्षाओं से गुज़रकर आज भी वहीं है, उसी धरती पर, उसी रास्ते पर—मानो धरती के इतिहास की एक बहती हुई याद।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर