Daily 24 भारत डेस्क: ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भारत को वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया एक नए अमेरिका-नियंत्रित ढांचे के तहत होगी. यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका भारत पर रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का दबाव बना रहा है और हाल ही में वेनेजुएला में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं.
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट ने फॉक्स बिजनेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल को दोबारा वैश्विक बाजार में आने देगा, लेकिन बिक्री पूरी तरह अमेरिकी सरकार की निगरानी में होगी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “आप या तो अमेरिका के साथ मिलकर तेल बेच सकते हैं, या फिर तेल नहीं बेच सकते.”
राइट के मुताबिक, तेल की बिक्री से होने वाली आय अमेरिका द्वारा नियंत्रित खातों में जमा होगी. उनका कहना है कि यह व्यवस्था वेनेजुएला के पूर्व नेतृत्व से जुड़ी कथित आपराधिक गतिविधियों और क्षेत्रीय अस्थिरता को खत्म करने के लिए जरूरी है. यह घोषणा 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद आई है. मादुरो पर ड्रग्स और हथियार तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण लेगा और अमेरिकी कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर उत्पादन बढ़ाएंगी.
इसी कड़ी में इस हफ्ते काराकास और वाशिंगटन के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत 30 से 50 मिलियन बैरल वेनेजुएला का कच्चा तेल अमेरिका को निर्यात किया जाएगा. इसकी अनुमानित कीमत करीब 2 अरब डॉलर बताई जा रही है. फिलहाल वेनेजुएला के भंडारण टैंकों और जहाजों में लाखों बैरल तेल फंसा हुआ है, जिसे अब अमेरिकी नियंत्रण में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाएगा. भारत के लिए यह एक अहम मौका माना जा रहा है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और उसकी रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं. वर्ष 2019 से पहले भारत वेनेजुएला का एक बड़ा खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते आयात बंद हो गया था.
अब नए अमेरिकी ढांचे के तहत भारत फिर से वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है, जिससे रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है. सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कुछ भारतीय रिफाइनरियां पहले से ही अमेरिकी प्रशासन से अनुमति को लेकर बातचीत कर रही हैं. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील आगे बढ़ती है, तो भारतीय रिफाइनरियों को अपेक्षाकृत सस्ता भारी कच्चा तेल मिल सकता है. इससे रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर होंगे और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी. हालांकि, आयात की मात्रा सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि पूरे सिस्टम पर अमेरिका का नियंत्रण बना रहेगा.