Daily 24 भारत डेस्क: उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को उस समय नाराज़ हो गईं जब वह किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पहुंचीं, लेकिन कुलपति से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी. अपर्णा यादव रमीज और कथित धर्मांतरण से जुड़े मामले की जानकारी लेने के लिए केजीएमयू पहुंची थीं.
वीसी से मुलाकात न होने के बाद अपर्णा यादव ने प्रेस वार्ता कर केजीएमयू प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा,“महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं सिर्फ जानकारी लेने आई थी, लेकिन मुझसे मिलने कोई नहीं आया.”
अपर्णा यादव ने दावा किया कि उन्होंने पीड़िता से स्वयं बात की थी. पीड़िता के अनुसार, केजीएमयू के एचओडी को पूरे मामले की जानकारी देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता को केजीएमयू के एक सीनियर डॉक्टर ने यह तक कहा कि वह महिला आयोग क्यों गई. महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी को बचाने के लिए कुछ लोग जानबूझकर काम कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने विशाखा कमेटी की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए. अपर्णा यादव का कहना है कि जिन लोगों ने बयान दिए, उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है और रिपोर्ट को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है.
केजीएमयू वीसी से मुलाकात न होने को लेकर अपर्णा यादव ने कहा कि अगर संवाद होता, तो किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता था और शायद उन्हें प्रेस वार्ता भी नहीं करनी पड़ती. उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश सरकार इस पूरे मामले में विधि और न्याय के अनुसार कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे मामलों को लेकर सतर्क रहते हैं. अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप भी लगाए. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन मौन बना हुआ है. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि केजीएमयू में पिछले दो वर्षों से बिना लाइसेंस के ब्लड बैंक संचालित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यदि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को इस बारे में जानकारी मिलेगी, तो वह इसे गंभीरता से लेंगी.
अपर्णा यादव ने यह भी आरोप लगाया कि जब आरोपी रमीज मलिक फरार हुआ, उस दौरान वह केजीएमयू के कुछ प्रोफेसरों के संपर्क में था. उन्होंने प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू का नाम लेते हुए सवाल किया कि केजीएमयू प्रशासन ने अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की. फिलहाल केजीएमयू प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केजीएमयू में हुई घटना को गंभीरता से लिया है। हंगामा करने और अराजकता फैलाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को तलब किया। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने उनसे मेडिकल कॉलेज में हुई घटना के बारे में जानकारी ली।