Daily 24 भारत डेस्क: लैंड फॉर जॉब मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट की इस टिप्पणी ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है.
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को लैंड फॉर जॉब मामले में बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने कुल 98 आरोपियों में से 52 को आरोपमुक्त कर दिया है, जबकि बाकी बचे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए गए हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में 5 आरोपियों की मौत हो चुकी है, ऐसे में अब 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलेगा. मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी.
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— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 9, 2026
इस मामले में कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है.अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और इस पूरे मामले में विस्तृत ट्रायल की आवश्यकता है.अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और अपनी पत्नी व बच्चों के नाम अचल संपत्तियां जुटाईं.अदालत के अनुसार, रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन लेने का एक तरह का विनिमय तंत्र चल रहा था. कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में उनके या उनके परिजनों की जमीन ली गई.
राउज एवेन्यू कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू परिवार ने इस पूरे मामले में एक क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया. कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा थे, जबकि अन्य आरोपियों ने इस षड्यंत्र को अंजाम देने में सहयोग किया. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन 52 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया है.इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120B के तहत आरोप तय किए गए हैं.इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(D) और 13(2) के तहत भी आरोप तय किए गए हैं.
गौरतलब है कि लैंड फॉर जॉब मामला उस वक्त का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे में नियुक्तियों के बदले जमीन ली गई.अदालत के इस फैसले से लालू परिवार की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं. अब सभी की निगाहें 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं.