डेली24भारत: समूचे देश में इंडिगो को लेकर हाहाकार मचा है। हालात जल्दी सुधरेंगे, इसके आसार भी नहीं दिखते, क्योंकि उनकी ओर से एक अधिकृत बयान में बताया गया है कि 15 दिसंबर तक स्थिति सुधर सकती है जिसपर भी संदेह बरकरार है। पर,असल समस्या है ‘मनोपॉली’ यानी एकाधिकार। जो विभिन्न किस्म की समस्याओं को जन्म देती है. ये आफत प्रतिस्पर्धा को तेजी गति प्रदान करती है जिससे कंपनियां न सिर्फ ऊंची कीमतें वसूलती हैं, बल्कि गुणवत्ता भी घटा देती हैं।
इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स ने बताया,”10-15 दिसंबर के बीच हालात सामान्य होंगे, इंडिगो के पूरे सिस्टम को रीबूट किया जा रहा है”। @IndiGo6E #IndiGo #PeterElbers #FlightCrisis pic.twitter.com/CKK2tRAWzV
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इंडिगो की घटना भी एकाधिकार का ही कारण है। केंद्र सरकार की अटपटी नीतियों के चलते ही इंडिगो ने अपनी मनमानियां की हैं। 2006 के अगस्त में दिल्ली-मुंबई के बीच उड़ान से शुरू हुई इंडिगो की कहानी आज ऐसे मोड़ पर है जहां से आगे के कदम बढ़ाना बेहद मुस्किल हो गया है। 2005 में इंडिगो की नींव रखी गई थी।
SC पहुंचा इंडिगो संकट, CJI से तत्काल दखल देने की मांग@IndiGo6E #IndigoDelay #IndiGoCrisis #SupremeCourt
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आज भारत के विमानन बाजार में इंडिगो सबसे बड़ी खिलाड़ी है उसकी इस क्षेत्र में करीब 64 फीसदी हिस्सेदारी है। अब यही बड़ा कद उसकी हजारों उड़ानें कैंसिल होने और यात्रियों को हुई बेशुमार दिक्कतों के चलते सवालों के घेरे में है। संसद में भी इंडिगो की कथित ’मनॉपली’ पर सवाल उठे। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तो इस संकट को सीधे केंद्र की ‘मनॉपली मॉडल’ को जिम्मेदार ठहराया है।
डॉ. रमेश ठाकुर
(Accredited Journalist, TV News Panelist, Writer, Child rights Activist)