डेली24भारत डेस्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के सम्मान में आयोजित राजकीय रात्रिभोज एक भव्य और पारंपरिक भारतीय अनुभव का अद्भुत मिश्रण था। इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक और पाक परंपराओं को बड़ी ही नफासत के साथ पेश किया गया।
रात्रिभोज की शुरुआत दक्षिण भारत की खासियत, मुरुंगेलाई चारू, से हुई। यह एक हल्की और सुगंधित सूप जैसी डिश थी, जो ठंडी राजधानी की शाम में गरमी और ताजगी दोनों का एहसास कराती थी। इसके बाद मेहमानों के लिए विभिन्न व्यंजन परोसे गए, जिनमें भारत के अलग-अलग हिस्सों का स्वाद और रंग झलकता था—कश्मीर की मिठास और मसालों का संगम, हिमालय की ताजगी और पूर्वोत्तर की अनोखी खुशबू।
मुख्य थाली में गुच्ची दून चेतिन जैसे मशरूम और कश्मीरी अखरोट की चटनी से बने व्यंजन थे, जो अपने स्वाद और बनावट में बेजोड़ थे। साथ में अचारी बैंगन और पीली दाल तड़का ने भारतीय मसालों की गहराई और सुगंध को उजागर किया। शिकमपुरी कबाब और झोल मोमो ने शाकाहारी और मांसाहारी स्वादों का संतुलन बना दिया।
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भोज के दौरान मुख्य भोजन का स्वरूप अत्यंत राजसी था। पनीर के केसरयुक्त रोल, पालक और मेथी का गाढ़ा साग, तंदूर में पके भरवां आलू और अचारी बैंगन को खास तौर पर सजाया गया था। दाल का देसी तड़का और ड्राई फ्रूट्स से महकता केसर पुलाव इस थाली में स्वाद और सुंदरता दोनों का समन्वय प्रस्तुत कर रहा था। रोटियों में लच्छा पराठा, मिस्सी रोटी, मगज नान, सतनाज और बिस्कुटी रोटी जैसी विविधता देखकर मेहमान भारतीय व्यंजन संस्कृति की भव्यता का अनुभव कर सकते थे।
मीठे व्यंजन में बंगाली मिठाई गुड़ संदेश और दक्षिण भारतीय स्नैक मुरुक्कू शामिल थे, जबकि रात्रिभोज का समापन बादाम के हलवे जैसे गरम और मिठास भरे व्यंजन से किया गया, जो ठंडी राजधानी की शाम में दिल को गर्माहट और मिठास से भर देते थे।
संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने इस भोज को और भी यादगार बना दिया। नौसेना की बैंड और शास्त्रीय कलाकारों ने सरोद, सारंगी और तबला जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर अद्भुत संगीत प्रस्तुत किया। भारतीय शास्त्रीय संगीत, बॉलीवुड धुनें और रूसी संगीत का संयोजन दोनों देशों की सांस्कृतिक गहराई और मित्रता को दर्शा रहा था। बैंड ने शाहरुख खान की फिल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी के एक गीत की प्रस्तुति दी, साथ ही रूसी लोकधुन की झलक भी प्रस्तुत की गई।
इस पूरे आयोजन में हर व्यंजन, हर संगीत और हर प्रस्तुति भारतीय परंपरा की भव्यता, विविधता और सौंदर्य का प्रतीक थी। यह भोज न केवल एक खाने का अनुभव था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आतिथ्य का जीवंत चित्रण भी था।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर