डेली24भारत डेस्क: रूस की संसद ने भारत के साथ रक्षा सहयोग समझौते को मंजूरी दे दी है। स्टेट ड्यूमा, रूस के निचले सदन ने इस द्विपक्षीय समझौते को हरी झंडी दिखाई है, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं और सैन्य उपकरण एक-दूसरे के क्षेत्रों में तैनात हो सकेंगे। यह फैसला राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4-5 दिसंबर 2025 के भारत दौरे से ठीक एक दिन पहले लिया गया, जो संकेत देता है कि रूस भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। इसे भारत सरकार की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
भारत की प्रशंसा
स्टेट ड्यूमा के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोदिन ने इस अवसर पर भारत को “रणनीतिक, बड़ा और भरोसेमंद साझेदार” बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता “दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम” है।
RELOS क्या है और इसका महत्व
RELOS (रूस-भारत सैन्य लॉजिस्टिक सहयोग) एक समझौता है जो दोनों सेनाओं को कई सुविधाएं उपलब्ध कराता है:
- भारत और रूस एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र, सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
- दोनों देशों को ईंधन, गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सहायता और मरम्मत सुविधाएं साझा करने की अनुमति होगी।
- इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा:
- संयुक्त सैन्य अभ्यास
- आपदा और राहत कार्य
- मानवीय सहायता
- प्रशिक्षण और सामरिक संचालन
भारत पहले ही अमेरिका, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ इसी तरह के समझौते कर चुका है। रूस के साथ यह समझौता इसलिए खास है क्योंकि दोनों देशों के रक्षा संबंध दशकों से मजबूत रहे हैं।
पुतिन की यात्रा का महत्व
रूसी राष्ट्रपति पुतिन जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। RELOS समझौते की मंजूरी यह संदेश देती है कि रूस अमेरिका और पश्चिमी दबावों के बावजूद भारत को प्राथमिकता देता है।
अमेरिकी दबाव के बावजूद रणनीतिक संकेत
रूस ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब:
- अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर दबाव बना रहा है।
- अमेरिका ने रूसी तेल पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया है।
भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी। रूस इसे भारत की स्वतंत्र नीति के रूप में देखता है और इसकी सराहना करता है।
भारत-रूस सहयोग की व्यापक तस्वीर
भारत और रूस दशकों से रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, परमाणु और आर्थिक क्षेत्रों में मजबूत साझेदार रहे हैं।
RELOS समझौता इसे और अधिक ठोस और व्यावहारिक बनाता है:
- भारतीय नौसेना को रूस के आर्कटिक और फार ईस्ट क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।
- रूसी जहाज भारतीय महासागरीय क्षेत्र में ईंधन और तकनीकी सहायता ले सकेंगे।
- दोनों देशों के सैन्य और रणनीतिक सहयोग में नई ताकत और गति आएगी।
निष्कर्ष
RELOS समझौते से यह स्पष्ट होता है कि:
- भारत और रूस आज भी भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार हैं।
- पुतिन के भारत दौरे के दौरान रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े फैसले हो सकते हैं।
- वैश्विक दबावों के बावजूद दोनों देश अपने संबंधों को स्वतंत्र और मजबूत बनाए रखना चाहते हैं।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर