लता के.सी / डेली 24 भारत : बिहार विधानसभा चुनाव इस बार कई कारणों से चर्चा में है। हर चुनाव में कुछ खास बातें होती हैं, लेकिन इस बार का सबसे दिलचस्प विषय दो भाइयों—तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव—की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। दोनों एक ही परिवार से आते हैं, दोनों ने एक ही मां का आशीर्वाद पाया है, लेकिन अब चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं। यह मुकाबला सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि भावनाओं और पारिवारिक मतभेदों का भी प्रतीक बन गया है।
तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेजप्रताप के खिलाफ महुआ सीट पर अपने करीबी मुकेश रौशन को टिकट देकर यह साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी राजनीतिक रणनीति से समझौता नहीं करेंगे। वहीं, तेजप्रताप भी पीछे हटने वालों में नहीं हैं। उन्होंने पहले ही कहा था कि अगर तेजस्वी महुआ में उनके खिलाफ प्रचार करने आए, तो वे भी राघोपुर जाकर अपने भाई के खिलाफ प्रचार करेंगे। अब जबकि तेजस्वी ने महुआ से रौशन को उम्मीदवार बनाया है, मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।
वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट को आरजेडी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। 2015 में यहीं से तेजप्रताप यादव ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। इस बार वे अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के बैनर तले मैदान में हैं। पर्चा दाखिल करते समय उनके साथ परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, जिससे यह साफ झलकता है कि यादव परिवार में राजनीतिक खींचतान चरम पर है।
तेजप्रताप को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। उनमें अपने पिता लालू प्रसाद यादव जैसी वाकपटुता और सरल स्वभाव है, जिसने उन्हें सोशल मीडिया पर लोकप्रिय बना दिया है। हाल के दिनों में वे अपने बयानों में संयम दिखा रहे हैं और परिपक्व राजनीति की दिशा में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। महुआ गंगा के मैदानी इलाके में स्थित है और यहां की भूमि अत्यंत उपजाऊ है। मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का और दालों की खेती होती है। नहरों और भूजल से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। कहा जाता है कि इस क्षेत्र का नाम यहां पाए जाने वाले महुआ वृक्षों के कारण पड़ा। 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने से पहले यह क्षेत्र देसी शराब उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र माना जाता था।
महुआ विधानसभा सीट पर इस बार कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं।
- जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) से तेज प्रताप यादव
- राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से मुकेश कुमार रौशन
- लोजपा (रामविलास) से संजय कुमार सिंह
- जन सुराज पार्टी से इंद्रजीत प्रधान
यहां यादव और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा पासवान और रविदास समुदाय के मतदाता भी महत्वपूर्ण संख्या में हैं। अगर यादव वोटों में बंटवारा हुआ तो मुकाबले का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
महिलाएं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 48% हैं, विकास से जुड़े मुद्दों पर वोट देने की संभावना रखती हैं—और तेजप्रताप का मेडिकल कॉलेज का वादा इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।
2008 के परिसीमन के बाद बनी यह सीट लालू यादव की सामाजिक न्याय की राजनीति से गहराई से जुड़ी रही है।
- 2010: जेडीयू के रविंद्र राय ने एनडीए की लहर में जीत हासिल की।
- 2015: तेजप्रताप यादव ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के रविंद्र राय को 28,155 वोटों से हराया। यह जीत यादव-मुस्लिम गठबंधन और महागठबंधन की ताकत का प्रतीक थी।
- 2020: तेजप्रताप हसनपुर सीट से जीते, जबकि महुआ से आरजेडी के मुकेश रौशन ने जीत दर्ज की।
अब 2025 के चुनाव में महुआ फिर सुर्खियों में है—जहां भाई-भाई के बीच की यह राजनीतिक जंग बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है।