डेली24भारत डेस्क: वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर कैराना की सांसद इकरा हसन ने संसद में एक विशेष और ध्यान आकर्षित करने वाला भाषण दिया। जैसे ही उन्होंने सदन में बोलना शुरू किया, माहौल शांत और उत्सुकता भरा था। उन्होंने राष्ट्रगीत की पंक्तियों का अर्थ और उसका संदर्भ बहुत सहज और स्पष्ट तरीके से समझाया। कई सांसदों को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि वंदे मातरम के शब्द किन भावनाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों से जुड़े हुए हैं।
अपने संबोधन में इकरा हसन ने यह बात खास तौर पर बताई कि देश में वंदे मातरम को गाने के लिए कभी कोई जबरदस्ती या कानूनी अनिवार्यता नहीं रही। यह हमेशा सम्मान और स्वेच्छा का विषय रहा है। उन्होंने इस संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए यह सुनिश्चित किया कि कोई भी व्यक्ति राष्ट्रगीत के लिए मजबूर न किया जाए। उनके अनुसार, वाजपेयी जी ने ‘राजधर्म’ निभाते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया था—कि लोग राष्ट्रगीत को सम्मान के साथ गाएं, लेकिन इसे किसी पर थोपना नहीं चाहिए।
जब इकरा हसन ने राष्ट्रगीत के शब्दों का शाब्दिक अर्थ और उसमें निहित भावनाओं को समझाया, तो कई सदस्य हैरान रह गए। उनका भाषण तथ्यों, शांत भाव और तार्किकता से भरा था। सदन में मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इसे खूब सराहना मिली। भाषण का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल गया। लोग इसे संतुलित, सूझबूझ भरा और शांति का संदेश देने वाला बता रहे हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह भाषण याद दिलाता है कि राष्ट्रगीत का सम्मान उसकी भावना में है, न कि दबाव या अनिवार्यता में।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर