Daily 24 भारत डेस्क: लखनऊ मेट्रो रेल की सुविधा सूची में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मेट्रो रेल को विशेष सुख-सुविधा मामले में अधिसूचीत कर दिया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए़) की बैठक में इस बड़े निर्णय को लिया गया। जिसके चलते मेट्रो रूट के आसपास के मानचित्रों को मंजूरी दिलाने के लिए सुख सुविधा शुल्क लेना अनिवार्य हो गया है। दरअसल, एलडीए के अध्यक्षों ने मेट्रो लाइन को लेकर एक अहम फैसला लिया है। जिसमें मेट्रो रूट के इर्द गिर्द होने वाली सुख सुविधाओं पर शुल्क लेने का रास्ता साफ कर दिया गया है। इस बैठक में जनहित के कई प्रस्तावों पर मंजूरी दी गई है।
परिजात सभागार में हुई प्राधिकरण बोर्ड की 186वीं बैठक में एलडीए के अध्यक्ष और मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत शामिल रहे। कहा जा रहा है कि शासन से अनुमोदन आने के बाद इसको लागू कर दिया जाएगा। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि सुख सुविधा को दायरे में लाने के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से अनुरोध किया था। इससे मेट्रो रेल पर सुविधा के लिए बने भवनों के मानचित्रों पर अलग से शुल्क लिया जाएगा। जिससे शुल्क सुविधा को अधिरोपित किया जा सकेगा। यहां से जो शुल्क प्राप्त होगा उस धनराशि से लंबे समय के लिए स्थिरता का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही इससे लखनऊ मेट्रो रेल की विकास प्रणालियों को बल मिलेगा। सुख सुविधा शुल्क कितना और किस दायरे में लिया जाएगा, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। प्राधिकरण सचिव विवेक श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि यहां से जो धनराशि आएगी वह मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के दायरे में चली जाएगी।
अगस्त में लाया गया ग्रीन कॉरिडोर
सुख सुविधा शुल्क के दायरे में इससे पहले ग्रीन कॉरिडोर को अगस्त में ही ला दिया गया था। उस समय सुविधा शुल्क को एलडीए की बोर्ड बैठक में विस्तार दिया गया था। साथ ही वहां पर इसकी दरें भी बढ़ाई गई थीं। जिन्हें 200 से 550 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक कर दिया गया था। इस शुल्क को शहीद पथ, किसानों के लिए बनाए गए पथ और ग्रीन कॉरिडोर के लिए लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि लखनऊ के बाद राज्य के उन शहरों को भी इस लिस्ट में शामिल किया जाएगा, जिनमें मेट्रो रेल चलती है।
इस साल मेट्रो रेल निगम ने लखनऊ के सहित कानपुर और आगरा में संचालित विशेष सुख सुविधा शुल्क को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। जिससे मेट्रो परियोजनाओं को विशेष सुविधा परियोजना घोषित किया गया था। एलडीए के अधिकारी ने कहा कि इसका पत्र भेजा गया था, जोकि प्रमुख सचिव आवास के पास गया था। जो प्राधिकरणों के अधिकारी थे, उन्हें भी इसमें बजट देने के लिए कहा गया था। इसका उद्देश्य मेट्रो की स्थिति का सुधार करना था