डेली24भारत डेस्क: बंगाल में एक बार फिर राजनीति और धर्म से जुड़ा तनाव बढ़ता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किए गए नेता हुमायूं कबीर का दावा है कि वे मुर्शिदाबाद के बेलडांगा गांव में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। पार्टी से बाहर होने के बाद उनके तेवर और ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। टीएमसी ने 4 दिसंबर को उन्हें सस्पेंड कर दिया और आधिकारिक रूप से कहा कि इस पहल से पार्टी का कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद कबीर का कहना है कि वे खुद पार्टी छोड़ेंगे और 22 दिसंबर को अपनी नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे।
कबीर ने उसी स्थान पर मीडिया से बातचीत की, जहाँ वे नींव रखने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि मस्जिद के लिए आठ कट्टा जमीन तय की गई है। हालांकि, पहले जमीन मालिक का कहना था कि वहाँ पेट्रोल पंप बनाया जाएगा, मस्जिद नहीं। कबीर का कहना है कि इस कार्यक्रम में करीब दो लाख लोग जुटेंगे और निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट और कंक्रीट भी पहले ही पहुंचा दी गई है। प्रस्तावित मस्जिद के डिजाइन में तीन गुंबद होंगे, जो अयोध्या की बाबरी मस्जिद से प्रेरित बताए जा रहे हैं।
इसके साथ ही कबीर की नई पार्टी 130 से 135 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, और अफवाहें हैं कि वे खुद को बंगाल का “ओवैसी” बनते देखना चाहते हैं। इस दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
मुर्शिदाबाद के कई इलाकों में मस्जिद से जुड़े पोस्टर, बैनर और पर्चे लग चुके हैं, जिससे लोगों में चर्चा और भ्रम बढ़ गया है। ममता बनर्जी ने कबीर से पूरी तरह दूरी बना ली है। पार्टी का कहना है कि उनकी किसी भी गतिविधि से टीएमसी का कोई रिश्ता नहीं है राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि कबीर का ये कदम प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।
कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले में स्थिति यथास्थिति रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट का कहना है कि शांति और सौहार्द बरकरार रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अदालत ने नींव रखने के कार्यक्रम को रोकने का आदेश नहीं दिया, लेकिन प्रशासन को पूरी सतर्कता के साथ मौके की स्थिति संभालने को कहा गया है। कबीर दावा कर रहे हैं कि मस्जिद के लिए दो भूखंड चुने गए हैं, जो हाईवे के पास और बेलडांगा पुलिस स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में भारी भीड़ पहुंचेगी और इसके लिए उन्होंने प्रचार भी तेज कर दिया है।
यह मामला राजनीतिक होने के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए प्रशासन और पुलिस को खास ध्यान रखने की चेतावनी दी गई है। अब सबकी निगाहें 6 दिसंबर पर टिकी हैं। राज्य भर में सुरक्षा और शांति बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ा परीक्षण साबित हो सकता है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर