डेली24 भारत डेस्क: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंच रहे हैं. इस हाई-प्रोफाइल दौरे से कुछ घंटे पहले ही दिल्ली की सियासत अचानक गरमा उठी. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मोदी सरकार विदेशी मेहमानों को विपक्षी नेताओं से मिलने से रोक रही है. राहुल गांधी का कहना है कि यह न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि ‘‘सरकार की असुरक्षा’’ को भी दर्शाता है. उनके इन बयानों ने संसद से लेकर मीडिया गलियारों तक नई बहस को जन्म दे दिया है.
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति में एक परंपरा रही है, जब भी कोई विशेष विदेशी अतिथि भारत दौरे पर आता है, तो वह नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात करता है. उन्होंने कहा कि यह परंपरा अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह दोनों के समय में निभाई गई, लेकिन अब इसे जानबूझकर तोड़ा जा रहा है.
राहुल गांधी के मुख्य बयान!
- ‘सरकार विदेशी मेहमानों को विपक्ष से मिलने से रोक रही है’
- ‘यह परंपरा रही है, पर अब विदेश मंत्रालय इसका पालन नहीं कर रहा’
- ‘मुझे बाहर जाने पर भी सुझाव दिया जाता है कि वहां कोई मुझसे न मिले’
- ‘यह सरकार की असुरक्षा की भावना है’
राहुल गांधी ने कहा कि भारत का प्रतिनिधित्व केवल सरकार नहीं करती, बल्कि विपक्ष भी देश की आवाज़ है. उनके अनुसार, विदेशी नेताओं से विपक्ष की मुलाकात को रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है.कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी राहुल गांधी के समर्थन में सामने आई. उन्होंने कहा कि विदेशी नेताओं से नेता प्रतिपक्ष की मुलाकात एक स्थापित प्रोटोकॉल है, जिसे वर्तमान सरकार तोड़ रही है.
प्रियंका गांधी के मुख्य बयान!
- ‘सरकार असुरक्षित महसूस करती है’
- ‘वे नहीं चाहते कि कोई दूसरी आवाज़ उठे’
- ‘लोकतंत्र में हर किसी की बात सुनी जानी चाहिए, पर सरकार दूसरी राय सुनना ही नहीं चाहती’
- ‘भगवान जाने, उन्हें किस बात का डर है’
रूस भारत का रणनीतिक, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है. ऐसी स्थिति में पुतिन की यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है. लेकिन यात्रा से पहले ही विपक्ष और सरकार के बीच बयानबाज़ी ने इसे राजनीतिक रंग भी दे दिया है. भारतीय लोकतंत्र में यह परंपरा लंबे समय से रही है कि देश में आने वाले महत्वपूर्ण विदेशी नेता सरकार के साथ-साथ विपक्षी नेताओं से भी मिलते रहे हैं. यह लोकतंत्र की विविधता और विपक्ष की भूमिका को दर्शाता है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस परंपरा को जानबूझकर खत्म कर रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि राजनयिक मुलाकातें सरकार की प्राथमिकता और रणनीति के अनुसार तय होती हैं.
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव के चलते सरकार विपक्ष को सीमित रखना चाहती है. वहीं अन्य विशेषज्ञ इसे केवल सरकारी प्रोटोकॉल और सुरक्षा प्राथमिकताओं का हिस्सा मानते हैं, जिसमें सरकार की मर्जी से मुलाकातें तय होती हैं.
रूस के राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा जहां भारत-रूस संबंधों को नई गति देने की उम्मीद जगाती है, वहीं इस यात्रा से ठीक पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों ने भारतीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. क्या वाकई सरकार विदेशी नेताओं को विपक्ष से मिलने से रोक रही है? क्या यह लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लंघन है या सिर्फ कूटनीतिक रणनीति? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में और स्पष्ट होंगे. लेकिन इतना तय है कि पुतिन की इस यात्रा से पहले दिल्ली की राजनीतिक गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर