Daily 24 भारत डेस्क: छठ पूजा बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने वाला पवित्र त्योहार है। इस साल यह पर्व 27 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह चार दिनों तक चलने वाला त्योहार सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है, जो ऊर्जा, प्रकाश और आशीर्वाद के प्रतीक हैं। यह पर्व परिवार की स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए मनाया जाता है। खासकर महिलाएं इस दौरान कठोर निर्जल व्रत रखती हैं और डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। यह पूजा आस्था, पवित्रता और अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है।
छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया का आशीर्वाद पाने के लिए मनाई जाती है। माना जाता है कि इससे जीवन में स्वास्थ्य, धन और शांति बनी रहती है। भक्त अपने परिवार की भलाई और बच्चों की लंबी उम्र की कामना करते हैं। यह त्योहार आत्म-अनुशासन, शुद्धता और एकता का संदेश देता है और समाज में भाईचारे और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।
छठ पूजा के चार दिन कैसे मनाए जाते हैं?
छठ पूजा कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होती है और सातवें दिन (षष्ठी) को समाप्त होती है।
इसके चार मुख्य चरण होते हैं –
- नहाय-खाय – पहले दिन भक्त स्नान कर शुद्ध भोजन करते हैं।
- खरना – दूसरे दिन पूरा दिन व्रत रखकर शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद बनाते हैं।
- संध्या अर्घ्य – तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- उषा अर्घ्य – अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा होता है।
इन अनुष्ठानों से तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं और परिवार में प्रेम व एकता बढ़ती है।
सूर्य देव और छठी मैया का संबंध
मान्यता है कि छठी मैया (षष्ठी देवी), सूर्य देव की बहन हैं। इसलिए इस दिन सूर्य देव और छठी मैया दोनों की पूजा की जाती है। भक्त दोनों से अपने परिवार की खुशहाली, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हैं।
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। व्रत रखने और पूजा करने से मन में शांति, कृतज्ञता और आत्मबल का भाव आता है। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और भगवान की कृपा बनी रहती है।