Daily 24 भारत डेस्क: नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए न्यूनतम मजदूरी में करीब 21% तक बढ़ोतरी का ऐलान किया है. यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएंगी और इसका फायदा लाखों श्रमिकों को मिलेगा.
नोएडा-गाजियाबाद को सबसे ज्यादा फायदा
नई व्यवस्था में सबसे ज्यादा फायदा नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) और गाजियाबाद के श्रमिकों को मिलेगा. ये दोनों जिले औद्योगिक हब हैं, इसलिए यहां मजदूरी दरें राज्य के बाकी हिस्सों से अधिक रखी गई हैं. सरकार का मकसद बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों को राहत देना है. दरअसल, हाल ही में नोएडा में मजदूरों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था. हालात बिगड़ने के बाद सरकार को तुरंत कदम उठाना पड़ा और अंतरिम वेतन वृद्धि का ऐलान किया गया. मजदूरों का कहना था कि मौजूदा वेतन महंगाई के हिसाब से बहुत कम है. किराया, खाना और रोजमर्रा के खर्चों के बाद उनके पास बचत नहीं हो रही थी. यही कारण है कि वे ₹18,000–₹20,000 मासिक वेतन की मांग कर रहे थे.
नोएडा-गाजियाबाद में श्रमिकों के लिए बड़ी खबर। सबसे ज्यादा बढ़ी सैलरी। UP में मजदूरी दरों में बढ़ोतरी लागू। अलग-अलग श्रेणियों के लिए नई दरें तय। पूरी राज्यवार लिस्ट जारी।#Noida #Ghaziabad #LabourSalary pic.twitter.com/aiuaFiLkxc
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) April 14, 2026
UP में पहले कितनी थी मजदूरी
बढ़ोतरी से पहले उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी कुछ इस तरह थी:
अकुशल: लगभग ₹11,300/माह
अर्द्ध-कुशल: लगभग ₹12,100/माह
कुशल: लगभग ₹13,900/माह
नई व्यवस्था में मजदूरी तीन स्तरों पर तय की गई है:
नोएडा-गाजियाबाद (सबसे ज्यादा वेतन)
नगर निगम वाले बड़े शहर (मध्यम वेतन)
अन्य जिले (कम वेतन)
अब 21% की बढ़ोतरी के बाद इन दरों में अच्छा इजाफा हुआ है, खासकर औद्योगिक जिलों में.
यानी क्षेत्र के हिसाब से मजदूरी में अंतर रहेगा, और NCR के औद्योगिक इलाके सबसे ऊपर रहेंगे. हालांकि बढ़ोतरी के बाद भी यूपी की मजदूरी दिल्ली से कम है, जहां अकुशल मजदूर को करीब ₹19,800 प्रति माह तक मिलता है. लेकिन यह फैसला यूपी के श्रमिकों के लिए बड़ा राहत कदम माना जा रहा है. यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकार अब मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है. हालांकि, आगे भी मजदूरों की मांगें जारी रह सकती हैं, क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ रही है. नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी राहत है, लेकिन यह भी साफ है कि बेहतर जीवन स्तर के लिए अभी और सुधार की जरूरत है. मजदूरी बढ़ी है, मगर उम्मीदें उससे भी ज्यादा बढ़ गई हैं.