डेली24भारत डेस्क: गणतंत्र दिवस से पहले जारी की गई इस वर्ष की पद्म पुरस्कारों की प्रोविजनल सूची न केवल उपलब्धियों की सूची है, बल्कि यह भारत के उन अनगिनत मौन नायकों (Unsung Heroes) को सम्मान देने का दस्तावेज़ भी है, जिन्होंने दशकों तक बिना किसी प्रचार के समाज की सेवा की। यह सूची इस बात का प्रमाण है कि देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान अब सिर्फ बड़े नामों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाले आम नागरिकों तक पहुँच रहा है।
विविध क्षेत्रों से आए असाधारण लोग
इस बार पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुने गए 45 लोगों का समूह अत्यंत विविध है। इनमें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, आजीविका निर्माण, पारंपरिक कला, लोक संगीत, हथकरघा, साहित्य और विज्ञान जैसे अनेक क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोग शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई लोग दूरदराज, पिछड़े और नक्सल प्रभावित इलाकों, सीमावर्ती राज्यों और आदिवासी क्षेत्रों से आते हैं।
अंके गौड़ा: ज्ञान को सबके लिए सुलभ बनाने की मिसाल
कर्नाटक के मैसूर के पास हरलाहल्ली गांव के रहने वाले अंके गौड़ा, जो कभी एक साधारण बस कंडक्टर थे, आज दुनिया की सबसे बड़ी फ्री-एक्सेस लाइब्रेरी ‘पुस्तक माने’ के संस्थापक हैं। 75 वर्षीय गौड़ा ने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा किताबें इकट्ठा करने और उन्हें आम लोगों तक पहुँचाने में लगाया।
‘पुस्तक माने’ में 20 भाषाओं में 20 लाख से अधिक किताबें और दुर्लभ पांडुलिपियाँ मौजूद हैं। उनका मानना है कि शिक्षा और ज्ञान हर व्यक्ति का अधिकार है, और इसी सोच ने उन्हें पद्म श्री के योग्य बनाया।
अरमिडा फर्नांडिस: नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी पहल
मुंबई की प्रसिद्ध पीडियाट्रिशियन डॉ. अरमिडा फर्नांडिस ने एशिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित किया। इस पहल से विशेष रूप से समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के जीवन बचाने में मदद मिली। उनका योगदान भारत में मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
लोक कला, संगीत और परंपराओं के संरक्षक
इस सूची में कई ऐसे नाम भी हैं जिन्होंने भारत की लुप्त होती लोक कलाओं और परंपराओं को जीवित रखा है।
- भगवानदास रायकवार (मध्य प्रदेश) बुंदेली युद्ध कला के प्रशिक्षक हैं, जिन्होंने इस पारंपरिक मार्शल आर्ट को नई पीढ़ी तक पहुँचाया।
- महाराष्ट्र के 90 वर्षीय आदिवासी कलाकार भीकलिया लाडकिया धिंडा दुर्लभ ‘तारपा’ वाद्य यंत्र बजाने के लिए जाने जाते हैं, जो लौकी और बांस से बनाया जाता है।
- गुजरात के धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या ने ‘मानभट्ट’ नामक पारंपरिक प्रदर्शन कला को संरक्षित किया।
शिक्षा, भाषा और साहित्य में योगदान
- बद्री थाटी ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल स्थापित कर शिक्षा की अलख जगाई।
- ओडिशा के संथाली लेखक और संगीतकार चरण हेम्ब्रम ने आदिवासी भाषा और संस्कृति को साहित्य व संगीत के माध्यम से समृद्ध किया।
- वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत, जो 60 वर्षों से अधिक समय से हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में लगे हैं, को साहित्य और शिक्षा श्रेणी में सम्मानित किया गया है।
विज्ञान, शिल्प और हथकरघा का योगदान
- हैदराबाद के जेनेटिसिस्ट कुमारसामी थंगराज ने अफ्रीका से भारत में मानव प्रवास पर महत्वपूर्ण शोध किया।
- मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव जटिल पीतल की नक्काशी में विशेषज्ञ हैं और भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
- हरियाणा के खेम राज सुंदरियाल ने हजारों कारीगरों को टेपेस्ट्री और जामदानी बुनाई सिखाई, पानीपत ‘खेस’ को पुनर्जीवित किया और हथकरघा उद्योग में नवाचार किए।
आम भारतीयों का असाधारण साहस
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष की सूची में शामिल अधिकांश लोगों ने व्यक्तिगत कठिनाइयों, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक संघर्षों के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। इनमें हाशिए पर पड़े समुदायों, दलितों, आदिम जनजातियों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग शामिल हैं। इन सभी ने महिलाओं, बच्चों, विकलांगों और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इस साल की पद्म श्री सूची वास्तव में भारत की आत्मा को दर्शाती है—वह आत्मा जो चुपचाप सेवा करती है, पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। ये पुरस्कार उन आम भारतीयों को सम्मानित करते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ या पहचान की चाह के, देश और समाज को बेहतर बनाने में लगे रहे। यह सूची न केवल सम्मान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर