डेली24भारत डेस्क: गुरुवार को ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को अचानक पांच घंटे के लिए बंद कर दिया, जिसके बाद इसे फिर से खोल दिया गया। हवाई क्षेत्र बंद होने के पीछे कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया, लेकिन विशेषज्ञ इसे अमेरिका द्वारा संभावित सैन्य कार्रवाई से पहले की सतर्कता के रूप में देख रहे हैं।
हवाई क्षेत्र बंद होते ही अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को अपनी उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े। हालांकि यह रोक केवल कमर्शियल फ्लाइट्स पर लागू थी और सैन्य या अन्य सरकारी उड़ानों को प्रभावित नहीं किया।
देश में वर्तमान हालात अत्यंत संवेदनशील हैं। ईरान में पिछले कुछ महीनों से लगातार बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, जिन पर सरकार की सख्त कार्रवाई जारी है। साथ ही, अमेरिका की ओर से सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनियां भी सामने आई हैं। कुछ रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। याद रहे कि पिछले साल जून में, जब ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक संघर्ष हुआ था, तब भी ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद कर दिया था।
भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित
ईरान के हवाई क्षेत्र के बंद होने से भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुईं। इंडिगो ने एक बयान जारी कर बताया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रूट बदलने की जरूरत पड़ी। वहीं, एयर इंडिया ने कहा कि उसकी फ्लाइट्स वैकल्पिक मार्ग से संचालित हो रही हैं, जिससे देरी या कुछ मामलों में उड़ान रद्द होने की संभावना है।
ये दोनों एयरलाइंस यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट रूट पर बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित करती हैं। इसलिए, अगर ईरान हवाई क्षेत्र को फिर से बंद करता है, तो उनके अंतरराष्ट्रीय संचालन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अन्य देशों और एयरलाइंस की चेतावनी
बुधवार को जर्मनी ने अपनी एयरलाइंस को ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने की नई एडवाइजरी जारी की। इससे पहले, लुफ्थांसा ने भी मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी उड़ानों के मार्गों में बदलाव किया था।
अमेरिका पहले से ही अपनी सभी कमर्शियल उड़ानों को ईरान के ऊपर से उड़ने की अनुमति नहीं देता, और दोनों देशों के बीच कोई सीधी उड़ान नहीं है। वहीं, फ्लाईदुबई और तुर्किश एयरलाइंस जैसी कंपनियों ने भी पिछले एक हफ्ते में ईरान के लिए कई उड़ानें रद्द की हैं।
ईरान का हवाई क्षेत्र क्यों है इतना अहम?
ईरान का हवाई क्षेत्र अंतरमहाद्वीपीय उड़ानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख ईस्ट-वेस्ट रूट पर स्थित है। यूरोप से दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया जाने वाली उड़ानों के लिए यह सबसे सीधा और कम दूरी वाला मार्ग है।
इस रूट का इस्तेमाल करने से एयरलाइंस समय और ईंधन दोनों की बचत कर सकती हैं। अगर ईरान के ऊपर से उड़ान की अनुमति नहीं मिलती, तो विमानों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है—या तो उत्तर की ओर या दक्षिण की ओर—जिससे उड़ान का समय कई घंटे बढ़ जाता है और लागत भी काफी बढ़ जाती है।
ईरान की पुरानी गलती
ईरान के हवाई क्षेत्र को लेकर वैश्विक चिंता की एक वजह उसकी पुरानी सुरक्षा भूल भी है। जनवरी 2020 में, ईरानी एयर डिफेंस ने यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट PS752 को दुश्मन का विमान समझकर दो मिसाइलें दाग दी थीं। इस त्रासदी में विमान में सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी। ईरान ने शुरू में इस विमान को मारने की बात खारिज की थी, लेकिन बाद में इसे स्वीकार करना पड़ा। इस हादसे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर