डेली24 भारत डेस्क: देशभर में गिग वर्कर्स और डिलीवरी कर्मचारियों की हालिया हड़ताल ने क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक बड़ा बदलाव ला दिया है. कई प्रमुख ई-कॉमर्स और डिलीवरी प्लेटफॉर्म अब अपने विज्ञापनों और प्रचार सामग्री से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा रहे हैं. इस कदम के पीछे सरकार की चिंता और श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना प्रमुख वजह है. केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया की सक्रिय भूमिका के बाद Blinkit ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट डिलीवरी के दावे को हटा दिया है और अन्य कंपनियों से भी ऐसा करने की उम्मीद जताई जा रही है.
पिछले कुछ वर्षों में क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों ने ग्राहकों को तेज और त्वरित सेवा का वादा करते हुए ‘10 मिनट डिलीवरी’ जैसे टैगलाइन का प्रयोग बढ़ा दिया था. हालांकि, इस तेज़ डिलीवरी की संस्कृति ने डिलीवरी कर्मचारियों पर भारी दबाव डाला. गिग वर्कर्स ने बार-बार चेताया कि इतनी कम समय में डिलीवरी का दबाव उनके लिए असुरक्षित परिस्थितियों को जन्म देता है. इसके अलावा, उनका आरोप है कि कंपनियां उनकी मेहनत का उचित भुगतान नहीं कर रही हैं और उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा भी नहीं दे रही हैं.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनियों को अपने ब्रांड प्रचार में निश्चित समय सीमा वाली डिलीवरी का उल्लेख नहीं करना चाहिए. उनका मानना है कि ग्राहकों को तेज सेवा की उम्मीद देना ठीक है, लेकिन इसे कर्मचारियों की सुरक्षा के जोखिम पर नहीं होना चाहिए. कंपनी अधिकारियों ने बताया कि ‘10 मिनट डिलीवरी’ का टैग हटाने का मतलब यह नहीं है कि अब डिलीवरी धीमी होगी। बल्कि इसका मकसद यह है कि डिलीवरी कर्मचारियों पर अनावश्यक और असुरक्षित दबाव न पड़े। Blinkit के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने विज्ञापन और प्रचार सामग्री से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है और जल्द ही इस बदलाव को अपने सभी प्लेटफॉर्म्स पर लागू कर देगी। इसी तरह, अन्य कंपनियों के भी इस दिशा में कदम उठाने की संभावना है।
Blinkit ने हटाया फीचर, 10 मिनट में डिलीवरी सर्विस बंद!#Blinkit #Zepto #10MinuteDelivery pic.twitter.com/i4j3YivWRW
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 13, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है. लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा और तेजी के दबाव में काम करने वाले डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा अब प्राथमिकता में शामिल हो रही है. इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार और कंपनियां अब गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों के मामलों को गंभीरता से ले रही हैं. देशभर में 25 और 31 दिसंबर को हुई गिग वर्कर्स की हड़ताल ने इस बहस को और तेज कर दिया था. हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनियां असुरक्षित डिलीवरी मॉडल अपना रही हैं, उन्हें कमाई में कटौती झेलनी पड़ रही है और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही. हालांकि नए साल की पूर्व संध्या पर अधिकांश शहरों में डिलीवरी सेवाएं सामान्य रहीं, लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा और गिग इकॉनमी में काम करने वालों के अधिकारों पर बहस देशव्यापी हो गई.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि कंपनियों और उपभोक्ताओं के बीच भरोसे को भी मजबूत करेगा. इससे यह भी संदेश जाता है कि तेज़ और त्वरित सेवा के बावजूद कर्मचारियों का भला प्राथमिकता में रखा जा सकता है. सरकार के हस्तक्षेप से यह भी साफ हुआ है कि क्विक कॉमर्स कंपनियों को अपने व्यावसायिक मॉडल में कर्मचारियों की भलाई और सुरक्षा को शामिल करना अनिवार्य है. इस फैसले के बाद, यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में डिलीवरी कंपनियां कर्मचारियों पर असुरक्षित दबाव डालने वाले वादों से बचेंगी और एक संतुलित, सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करेंगी. गिग वर्कर्स की सुरक्षा और अधिकारों को महत्व देने वाला यह कदम निश्चित रूप से क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर