Daily 24 भारत डेस्क: मालदीव ने अपनी मौजूदा और आगामी पीढ़ी को सेहतमंद रखने के लिए मुल्क को धूम्रपान मुक्त बनाने का बीड़ा उठा लिया है. कोई युवा धूम्रपान न कर सके इसके लिए ‘जेनरेशनल स्मोकिंग बैन’ नाम का एक सख्त और बेहद कठोर कानून बनाया है. कानून के मुताबिक वर्ष-2007 के बाद मालदीव में जन्में लोग अब भविष्य में कभी भी किसी सूरत में स्मोकिंग नहीं कर पाएंगे. अगर ऐसा किसी ने भूलवश किया, तो उसे भारी जुर्माना चुकाना होगा. कानून को पिछले महीने यानी 15 नवंबर से पूरे देश में लागू कर दिया गया है. मालदीव में अब तंबाकू-खैनी, गुटखा, बीड़ी सिगरेट, चरस-गांजा, अफीम या ई-सिगरेट को खरीदना और बेचना अपराध की श्रेणी में है. कोई दुकानदार अगर खुदा न खास्ता चोरीछिपे किसी को तंबाकू बेचता पकड़ा गया, तो उसे 50,000 मालदीवियन रूफिया यानी 2.88 लाख रुपए का जुर्माना देना पड़ेगा. वहीं, ई-सिगरेट या वेपिंग करते पकड़े जाने पर 5,000 रूफिया यानी 29,000 हजार रुपए बतौर जुर्माना देने होंगे. दूसरी बार जुर्माना लगने पर ड्राइविंग लाइसेंस को हमेशा के लिए निरस्त करने का प्रावधान है. ये नियम मालदीव जाने वाले अन्य देशों के लोगों पर भी लागू है.
इस अनोखे कानून का सबसे सुखद पहलू ये है कि उसे सत्ता और विपक्ष की आम सहमति से संसद में पारित किया गया. देश वासियों ने बकायदा जश्न मनाया. कानून बनने की खुशी में पक्ष-विपक्ष के सांसदों ने मिलकर पार्टी भी आयोजित की और एक-दूसरे को बधाईयां दीं. दरअसल, धूम्रपान ऐसी आधुनिक बीमारी के रूप में उभर चुकी है जिसने तकरीबन-तकरीबन प्रत्येक के दरवाजों पर दस्तक दे दी है. वाजिब सवाल यहां ये उठता है आखिर धूम्रपान के विरूद्ध मालदीव की तरह कठोर कदम भारत में क्यां नहीं उठाया जा सकता? किस बात की दिक्कत है. जबकि, डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भारत में नशे से मरने वालों की संख्या सर्वाधिक है. भारत में कुछ प्रदेशों के युवा नशे में उड़ रहे हैं. घर के घर तबाह हैं. ऐसों को देखकर फिल्ममेकर ‘उड़ता पंजाब’ जैसी फिल्मे भी बनाने लगे हैं. फिर भी कोई सुधार नहीं होता दिखता. नशेड़ियों का हर पल, हर जगह, उपहास उड़ता है. बावजूद इसके अपनी हरकतों से वो बाज नहीं आते? दुनिया में हर बरस 80 लाख मौतें होती हैं फिर भी कोई नहीं डर रहा.
मालदीव ने 1 नवंबर से ऐतिहासिक कानून लागू किया। 2007 के बाद जन्मा कोई भी व्यक्ति अब सिगरेट, तंबाकू या ई-सिगरेट न खरीद सकेगा और न पी सकेगा। कानून उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान। युवाओं को नशे से दूर रखकर स्वस्थ समाज बनाने की दिशा में बड़ा कदम।#Maldives #TobaccoBan… pic.twitter.com/M81wBMig64
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) December 16, 2025
नशा-धुम्रपान की बढ़ती समस्या को देखकर अब इतना तो तय है जब तक मालदीप जैसे सख्त कानून नहीं बनाए जाएंगे, स्थिति में सुधार नहीं होगा. मालदीप की भांति ज्यादा से ज्यादा देश अपने यहां ऐसे ही कानूनों को पारित कर अमल में लाने की दरकार है. हिंदुस्तान तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक देश है, सरकार राजस्व का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुटाती है. भारत में तंबाकू-धूम्रपान से सालाना 13.5 लाख लोग असमय मरते हैं. ‘सेंटर फॉर डिजीज कंटृल एडं प्रिवेशन’ के मुताबिक भारत सरकार प्रत्येक बरस अपने मरीजों पर 1.77 करोड़ रूपए खर्च करती है. ये जानते हुए भी कि तंबाकू कैंसर, फेफड़ों की बीमारी और हृदय रोग सहित कई पुरानी बीमारियों का प्रमुख कारण है. फिर भी लोग गुटखा-खैनी इस्तेमाल करते हैं. पंजाब पाकिस्तान के बॉर्डर सटा है जहां से चोरीछिपे हर दिन सैकड़ों किलो मादक पदार्थों की खेप पहुंचती हैं. तस्कर इसके लिए डृन का इस्तेमाल करते हैं. देखा जाए तो मालदीव ने अपनी पीढ़ियों को बचाने के लिए जो इच्छाशक्ति दिखाई है, वह अन्य मुल्कों के लिए एक नायाब उदाहरण जैसा है. उनका यह निर्णय नशे से प्रभावित देशों को धूम्रपान से लड़ने के लिए ना सिर्फ हिम्मत देगा, बल्कि स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाएगा.
मालदीव का नशा मुक्ति पर लिया कठोर निर्णय निश्चित रूप से साहसिक कदम कहा जाएगा. ऐसा करके मालदीव विश्व का पहला मुल्क बना है जहां साल 2007 के बाद जन्मा कोई इंसान कश से दूर रहेगा. मालदीव में धूम्रपान से सालाना मात्र 150 लोग ही जान गवाते हैं, फिर भी सरकार अपने नागरिकों के लिए इतनी फिक्रमंद है. कानून से जुड़ी एक अच्छी बात ये भी है कि यह नियम वहां पहुंचने वाले सैलानियों पर भी लागू रहेंगे. विश्व की सरकारें अगर ईमानदारी से जनहित की नीतियों पर मंथन करें, तो धूम्रपान पर मुक्ति पाना असंभव नहीं? मॉर्डन स्टेटस कहें, या पश्चिमी सभ्यता का विस्तार? देखा-देख युवा नशे की लत में घुसते जा रहे हैं. मालदीव ही नहीं, विश्व का कोई देश इस समय अछूता नहीं बचा, जहां के टीनएजर्स इस समस्या की गिरफत में न समाए हों? इस मामले में एशिया पहले पायदान पर है जहां बड़े स्तर पर मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त जारी है.
मालदीप सरकार द्वारा पारित ‘जेनरेशनल स्मोकिंग बैन’ दुनिया का पहला ‘तम्बाकू मुक्त’ कानून है. हालाकि, हिंदुस्तान में धूम्रपान पर पीढ़ीगत प्रतिबंध के संबंध में कोई विशेष कानून नहीं है. पर, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम जैसे कई कानून पहले से हैं. इसके अलावा समय-समय पर प्रदेश सरकारें अपने स्तर पर प्रतिबंध लगाती रहती हैं. जैसे, इस समय पंजाब सरकार ने नशा मुक्ति को लेकर अभियान छेड़ा हुआ है. अभियान के तहत महीने भर से मादक पदार्थों की धरपकड़ जारी है. दुर्भाग्य से इस तरह के अभियान या प्रदेश सरकारों की सख्तियां कारगर साबित नहीं हो पाती. कुछ समय बाद दम तोड़ देती हैं. हमारे यहां कागजों में ऐसी पाबंदियां की भरमार हैं जिनमें शिक्षण संस्थाओं जैसे स्कूल-कॉलेजों के सौ मीटर दूरी तक पान-मसाला बेचने की मनाही होती है. लेकिन अब स्कूलों के भीतर भी मादक पदार्थ पकड़े जाने लगे हैं. बीते दिनों ग्रेटर नोएडा के एक नामी कॉलेज में छात्रों के पास से पुलिस ने नशे की ढेर सारी सामाग्रिया बरामद की.
वैश्विक स्तर धूम्रपान के विरूद्व लड़ाई लड़ने की जरूरत अब महसूस होने लगी है. इस लड़ाई में पहला कदम मालदीप ने ब़ढ़ा दिया है. अब कोई ये भी नहीं कहेगा कि ‘बिल्ली के गले में कौन बांधे घंटी’. ऐसी पहल का इंतजार सभी को था लेकिन अब हो गई. कितनी सुखद खबर है कि दुनिया में पहली बार किसी देश ने तय किया कि उसकी आने वाली पीढ़ियां कभी सिगरेट, तंबाकू से अपने फेफड़े नहीं जलाएंगी. मालदीव की आबादी मात्र 5 से 7 लाख है और जीडीपी पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर है. मालदीप ने वर्ष 2024 में 40 करोड़ सिगरेट आयात की थी. कमाई की परवाह न करते हुए भी मालदीव ने अपने यहां पहुंचने वाले सैलानियों पर भी कानून लागू किया है. साफ-सफाई और सुंदरता में उसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता. हालांकि, वहां ई-सिगरेट और वेपिंग पर रोक करीब दशक भर पहले से थी. पर, अब पूर्ण प्रतिबंधित कर दिया है. युवा पीढ़ी की सेहत को बचाने के लिए सभी मुल्कों को ऐसे कानून बनाने चाहिए. मालदीव का धूम्रपान पर अंतिम प्रहार दुनिया के लिए सबक है.
डॉ. रमेश ठाकुर
(Accredited Journalist, TV News Panelist, Writer, Child rights Activist)