डेली24 भारत डेस्क: भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक मानी जाने वाली दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया. यह घोषणा एक ऐसे समय में हुई है जब यूनेस्को की अंतरसरकारी समिति का 20वां सत्र 13 दिसंबर तक नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित किया जा रहा है. यह पहली बार है जब भारत इस प्रतिष्ठित सत्र की मेजबानी कर रहा है. 78 देशों के नामांकनों पर विचार के बीच दिवाली को मिली यह मान्यता इसकी वैश्विक स्वीकार्यता और सांस्कृतिक महत्ता को और भी सुदृढ़ करती है.
यूनेस्को की घोषणा के बाद भारत में उल्लास और गौरव का माहौल देखने को मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को “हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण” बताते हुए कहा कि दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मूल्यों और सभ्यता का केंद्र है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यह त्योहार “रोशनी और सच्चाई का प्रतीक है, जिसकी वैश्विक लोकप्रियता अब और भी बढ़ेगी।” पीएम मोदी ने भगवान राम के आदर्शों को समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शक बताया.
घोषणा के तुरंत बाद लाल किले परिसर में और देशभर में “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” के नारे गूंज उठे. समारोह में उपस्थित प्रतिनिधियों ने भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों और उसकी विविधता की सराहना की, जिसे दिवाली अभिव्यक्त करती है. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दिवाली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने को “शांति और अच्छाई की जीत की शाश्वत अभिलाषा का सम्मान” बताया. उन्होंने कहा कि दिवाली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ी परंपरा है, जिसे पीढ़ियों से कुम्हारों, कारीगरों, कलाकारों और सामान्य जनमानस ने जीवित रखा है.
People in India and around the world are thrilled.
For us, Deepavali is very closely linked to our culture and ethos. It is the soul of our civilisation. It personifies illumination and righteousness. The addition of Deepavali to the UNESCO Intangible Heritage List will… https://t.co/JxKEDsv8fT
— Narendra Modi (@narendramodi) December 10, 2025
उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रतिष्ठित टैग एक जिम्मेदारी लेकर आता है, हमें सुनिश्चित करना होगा कि दिवाली के सांस्कृतिक मूल्य, उसके लोकाचार और उसकी पवित्र परंपराएं भविष्य की पीढ़ियाँ भी जानें. उन्होंने लोगों से आगामी दिवाली में “शांति, कृतज्ञता और साझा मानवता का एक अतिरिक्त दीप जलाने” का आग्रह किया. दीपावली को वैश्विक विरासत सूची में शामिल किए जाने के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार ने पूरे शहर में विशेष कार्यक्रमों की घोषणा की है.
- राजधानी की प्रमुख इमारतों को आकर्षक रोशनी से सजाया जा रहा है.
- मुख्य सड़कों पर रंगीन सजावट की जा रही है.
- एक विशाल दीप प्रज्ज्वलन समारोह आयोजित किया जा रहा है, जिसमें हजारों दीये एक साथ प्रज्वलित होंगे।
- यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर की चमक को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का अवसर होगा.
- दीपावली का महत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है. हिंदू, सिख, जैन और दुनिया भर में बसे भारतीय समुदाय इस त्योहार को अत्यंत उत्साह से मनाते हैं.
कई समुदायों में दिवाली पांच दिनों तक चलने वाला उत्सव है, जो अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. उत्तरी भारत में दीपावली को भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने के रूप में मनाया जाता है, जब उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी. इसीलिए यह त्योहार नई शुरुआत, आशा, समृद्धि और उत्साह का प्रतीक माना जाता है.अमावस्या की रात घरों में दीये जलाना, रंगोली बनाना, लक्ष्मी पूजा, पटाखों का उत्सव, नई वस्तुएं खरीदना और व्यापार की शुरुआत, ये सभी परंपराएं दिवाली को और भी विशेष बनाती हैं. धन की देवी लक्ष्मी की पूजा इस रात विशेष रूप से शुभ मानी जाती है. विदेश मंत्रालय ने भी इस अवसर को “भारत के सांस्कृतिक इतिहास का गौरवशाली क्षण” बताया. मंत्रालय ने लिखा कि दिवाली अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुकी है.
भारत की 15 सांस्कृतिक परंपराएँ अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हैं, जिनमें,
- कुंभ मेला
- कोलकाता की दुर्गा पूजा
- गुजरात का गरबा
- योग
- वैदिक मंत्रोच्चार
- रामलीला जैसी महत्त्वपूर्ण परंपराएँ शामिल हैं। दिवाली का जुड़ना इस सूची को और समृद्ध करता है.
दिवाली को वैश्विक सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया जाना केवल भारत के लिए सम्मान नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए आशा और प्रकाश का संदेश है. यह त्योहार उन मूल्यों का उत्सव है, जो किसी एक देश या धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वभौमिक हैं: प्रकाश, सत्य, सद्भाव, समृद्धि और मानवता. अब दिवाली सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि विश्व की सांस्कृतिक विरासत का जगमगाता दीप बन चुकी है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर