डेली24भारत डेस्क: लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रतीक है जो लोगों को जोड़ता, उन्हें प्रेरणा देता और देशभक्ति की ऊर्जा से भरता है। उनका कहना था कि ब्रिटिश शासन ने इस गीत को इतना खतरनाक समझा कि इसे कई बार प्रतिबंधित किया गया, फिर भी यह गीत लोगों के दिलों में अमर रहा।
अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान समय में सत्ता पक्ष हर चीज को अपने नियंत्रण में लाना चाहता है, लेकिन इतिहास की असली समझ और उसकी भावना को केवल वही समझ सकते हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। उन्होंने इंडिगो विमान संकट का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि क्या वाकई विमान उड़ नहीं रहे या उन्हें उड़ाने से रोका जा रहा है?
वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता की लड़ाई को दी ताकत
अखिलेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, जब देश अंग्रेजों के खिलाफ़ लड़ रहा था, वंदे मातरम् हर आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार और प्रेरणा स्रोत था। यह गीत लोगों को एकजुट करता और उनमें आत्मविश्वास भरता था। उन्होंने याद दिलाया कि जब रवींद्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में इसे गाया था, तभी से यह गीत देश की आत्मा बन गया।
ब्रिटिश शासन का डर और दमन
अखिलेश यादव ने बताया कि अंग्रेज वंदे मातरम् से इतने भयभीत थे कि उन्होंने इसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाए। 1905 से 1908 के बीच, ब्रिटिश सरकार ने इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया और जो भी इसे गाता पाया जाता, उस पर देशद्रोह का आरोप लगाया जाता। बंगाल में स्कूली बच्चों तक को यह गीत गाने पर जेल भेजा गया। अखिलेश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि इन रोकथामों के बावजूद वंदे मातरम् ने लोगों की एकजुटता और देशभक्ति की भावना को नहीं तोड़ा।
सत्ता पक्ष की राजनीति पर हमला
अखिलेश ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष हर महान चीज़ को अपने स्वामित्व में लेने की कोशिश करता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के गठन के समय पार्टी के मंचों पर सेक्युलर विचारधारा और समाजवादी नेताओं की तस्वीरें लगाई जाती थीं, ताकि लोगों में यह धारणा बने कि वे जेपी आंदोलन और उसके रास्ते का अनुसरण कर रहे हैं।
वंदे मातरम् की असली भावना
अखिलेश ने कहा कि वंदे मातरम् उन क्रांतिकारियों का गीत है जिन्होंने देश के लिए प्राण न्योछावर किए। जो लोग स्वतंत्रता संग्राम में शामिल नहीं हुए, वे इसकी गहराई और ऊर्जा को नहीं समझ सकते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आज भी कुछ लोग समाज को विभाजित करने की राजनीति कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे अंग्रेज शासन के समय करते थे।
राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, राजनीति का नहीं
अखिलेश ने जोर देते हुए कहा कि वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल का गीत नहीं है। इसके केवल दो शब्द भी लोगों में देशभक्ति और एकता की भावना जगा सकते हैं। उन्होंने यूपी में हाल ही में स्कूल बंद करने और छात्रों तथा शिक्षकों पर केस दर्ज करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने बच्चों को गीत गाने पर जेल भेजा, आज उसी तरह यूपी में पढ़ाने और पढ़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। यह रवैया स्वतंत्रता की भावना के बिल्कुल विपरीत है।
अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि हमें वंदे मातरम् की उस भावना को अपनाना चाहिए जिसने हमें अंग्रेजों के खिलाफ़ लड़ने की शक्ति दी। जाति, धर्म और राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर संविधान के मार्ग पर चलकर ही हम देश को मजबूत और एकजुट बना सकते हैं।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर