Daily 24 भारत डेस्क: ये वो गूंज है जो आज भी हमारे कानों को सुकून देती है। यूं कहें तो यह हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा है, जो दिल के किसी कोने में पुरानी यादों की तरह अब भी जिंदा है। ऐसी याद, जो जब भी जहन में आती है, तो जैसे किसी सूखे पत्ते में फिर से हरियाली लौट आती हो।
एड गुरु पीयूष पांडे नहीं रहे। ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ जैसे यादगार कैंपेन से जुड़े दिग्गज विज्ञापन विशेषज्ञ का निधन। चार दशकों तक ओगिल्वी इंडिया में किया शानदार काम, बदला भारतीय एडवरटाइजिंग का चेहरा।#PiyushPandey #Ogilvy #Advertising pic.twitter.com/CpkBasBW46
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) October 24, 2025
लेकिन इस बार वही गूंज एक बुरी खबर के साथ लौटी—विज्ञापन जगत के दिग्गज और पद्मश्री से सम्मानित पीयूष पांडे का निधन हो गया। उनका जाना न सिर्फ एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री के लिए, बल्कि पूरे रचनात्मक संसार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। पीयूष पांडे 27 वर्ष की उम्र में विज्ञापन जगत से जुड़े थे। उन्होंने अपने भाई प्रसून पांडे के साथ मिलकर शुरुआत की थी। दोनों ने मिलकर रोजमर्रा के उत्पादों के लिए रेडियो जिंगल्स तैयार किए और जल्द ही उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली। पीयूष पांडे का जन्म 5 सितंबर 1955 को हुआ था, और 23 अक्टूबर 2025 को मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली।
मशहूर हुए ऐड कैंपेन
- फेविकोल – “जोड़ तोड़ नहीं सकता”
- एशियन पेंट्स – “हर घर कुछ कहता है”
- कैडबरी डेयरी मिल्क – “कुछ खास है”
- पोलियो अभियान – “दो बूंद जिंदगी की”
- कोका-कोला – “ठंडा मतलब कोका-कोला”
- राजनीतिक अभियान – “अबकी बार मोदी सरकार”
- हच जैसे कई ब्रांडों के लिए भी यादगार विज्ञापन बनाए
उपलब्धियां और अवॉर्ड्स
- ओगिल्वी इंडिया के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन और ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर रहे।
- पहले एशियाई व्यक्ति बने जिन्होंने Cannes Lions Festival में ज्यूरी प्रेसिडेंट की भूमिका निभाई।
- वर्ष 2016 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हुए।