हेल्थ डेस्क: राजधानी दिल्ली की हवा लगातार दूसरे दिन ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है.जबरदस्त आतिशबाजी और पटाखाबाजी के बाद से दिल्ली में हवा की सेहत खराब है. एक्यूआई 400 के पार पहुंचा हुआ है.आसमान में दो दिनों से स्मॉग है.मौसम अजीब सा फील हो रहा है.जब हवा इस कदर खराब हो जाए तो मूड और ब्रेन पर जबरदस्त असर पड़ता है.हवा की ये खराब सेहत दिमागी तंदुरुस्ती को खराब कर सकती है.
साइंस और मेडिकल शोध कहते हैं कि उदासी, चिंता, घबराहट, गुस्सा आप पर हावी होने लगता है. चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. जब हवा का AQI 400 से ऊपर चला जाता है, तो यह “खतरनाक” श्रेणी में आता है, जहां PM2.5, NO₂ और O₃ जैसे प्रदूषक हवा में अच्छी खासी मात्रा में घुल जाते हैं. इस स्तर पर प्रदूषण मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है, कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और जब ये खून के प्रवाह के साथ मस्तिष्क तक पहुंचता तो ना केवल मूड बल्कि दिमाग से जुड़े कामों पर असर डालता है.
जब हवा का AQI स्तर ज्यादा होता है यानि हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है तो ये ब्रेन में रिलीज होने वाले सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे मस्तिष्क रसायनों को बाधित कर सकता है, जिससे अवसाद, चिंता और मूड संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं.इससे तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जो नींद की गड़बड़ी और भावनात्मक अस्थिरता पैदा करता है.लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट आती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है.प्रदूषण से मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है.PM2.5 कण दिमाग में इंफ्लेमेटरी सिटोकाइंस को सक्रिय करते हैं, जिससे मस्तिष्क में सूजन आती है. इसका असर अल्जाइमर और पार्किसंस जैसी बीमारियों के रिस्क को बढ़ा सकता है.
प्रदूषित हवा से ऑक्सीजन लेवल घटता है.नाक बंद रहती है, गहरी नींद नहीं आती है. नींद पूरी न होने से मूड और भी बिगड़ता है.अगर हवा की ये स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो ये खतरनाक हो जाता है.धीरे-धीरे दिमागी कार्यक्षमता में गिरावट होती है.उदासी और चिड़चिड़ाहट घेर लेती है और ब्रेन एजिंग में तेजी देखी गई है.प्रदूषण की गंभीरता को नजरअंदाज करना हमारे स्वास्थ्य के लिए भारी कीमत चुकाने जैसा है.जब AQI 400 से ऊपर पहुंचता है, तो यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि एक चेतावनी है कि हमें अपनी और अपने परिवार की सेहत का खास ख्याल रखना होगा.अपने दैनिक जीवन में सावधानियां बरतना, प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाना और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह लेना ही हमें इस खतरनाक स्थिति से सुरक्षित रख सकता है.इसलिए, स्वच्छ हवा के लिए जागरूक रहें और अपने मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा करें….
खुशी