डेली24भारत डेस्क: अगर आप भी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ट्रैफिक सिग्नल, हॉर्न की तेज आवाज़ और लंबी-लंबी जाम की लाइनों से परेशान हो जाते हैं, तो दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां यह सब लगभग देखने को ही नहीं मिलता। खास बात यह है कि यह देश भारत के बिल्कुल पास स्थित है और यहां जाने के लिए भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट या वीज़ा की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। यह देश है Bhutan — एक ऐसा शांत और अनुशासित राष्ट्र, जिसकी सड़क संस्कृति पूरी दुनिया के लिए मिसाल मानी जाती है।
ट्रैफिक से परेशान शहरों के बीच एक सुकून भरी जगह
आज के समय में Delhi, Mumbai और Bengaluru जैसे बड़े महानगरों में बाहर निकलते ही ट्रैफिक जाम और हॉर्न की आवाज़ आम बात हो गई है। कहीं जाने से पहले लोग कई बार सोचते हैं कि रास्ते में कितना समय बर्बाद होगा। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अधिकांश बड़े शहरों में ट्रैफिक सिग्नल और जाम रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा देश भी है जहां आज तक एक भी ट्रैफिक लाइट नहीं लगाई गई? फिर भी वहां न तो ट्रैफिक जाम लगता है और न ही हॉर्न का शोर सुनाई देता है।
बिना ट्रैफिक लाइट के भी व्यवस्थित यातायात
भारतीय नागरिकों के लिए सबसे खास बात यह है कि इस देश की यात्रा बेहद आसान है। कई लोग सोचते हैं कि शायद यह देश Nepal या Myanmar होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। सही जवाब है — भूटान।
भूटान में आधुनिक दुनिया के बावजूद ट्रैफिक को बिना सिग्नल लाइट के सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जाता है। यहां आपको लाल, पीली और हरी ट्रैफिक लाइट्स सड़कों पर दिखाई नहीं देंगी, लेकिन इसके बावजूद वाहन पूरी अनुशासन के साथ अपनी-अपनी लेन में चलते हैं और जाम की स्थिति बहुत कम बनती है।
भूटान का अनोखा रोड कल्चर
भूटान की सड़क संस्कृति परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण है। यहां के लोग विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी संजोकर रखते हैं। सड़क पर वाहन चालक, पैदल यात्री और साइकिल सवार सभी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।
यहां ड्राइविंग का तरीका शांत और संयमित होता है। लोग जल्दबाज़ी नहीं करते, बल्कि सुरक्षा और धैर्य को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि यहां हॉर्न की आवाज़ बहुत कम सुनाई देती है।
क्यों नहीं हैं ट्रैफिक लाइट्स?
भूटान में ट्रैफिक लाइट्स न होना कोई कमी नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय है। साल 1995 में राजधानी Thimphu में ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे, लेकिन स्थानीय लोगों को यह व्यवस्था पसंद नहीं आई। उनका मानना था कि इससे लोगों के बीच मानवीय संवाद कम हो जाता है और पारंपरिक प्रणाली ज्यादा प्रभावी है। इसलिए बाद में ट्रैफिक लाइट्स हटा दी गईं।
बिना सिग्नल के कैसे नियंत्रित होता है ट्रैफिक?
अब सवाल उठता है कि बिना ट्रैफिक लाइट्स के ट्रैफिक कैसे संभाला जाता है। इसका जवाब है — प्रशिक्षित ट्रैफिक पुलिस।
भूटान में ट्रैफिक पुलिसकर्मी चौराहों पर पारंपरिक तरीके से हाथों के इशारों द्वारा यातायात नियंत्रित करते हैं। उनकी ट्रेनिंग इतनी उत्कृष्ट होती है कि वे बड़ी आसानी से वाहनों की आवाजाही संतुलित कर लेते हैं। खास डिजाइन वाले सुंदर ट्रैफिक बूथ भी जगह-जगह बनाए गए हैं, जो शहर की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं।
धीमी रफ्तार, सुरक्षित सफर
जहां दुनिया के कई शहरों में ट्रैफिक जाम के दौरान लोग झगड़ने लगते हैं, वहीं भूटान में लोग धैर्य और शांति के साथ वाहन चलाते हैं। यहां स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन किया जाता है। पहाड़ी रास्तों में वाहन आमतौर पर 20 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं और राजधानी में भी 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति कम ही देखने को मिलती है।
अगर आप भी भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ शांत और सुकून भरे पलों की तलाश में हैं, तो भूटान आपके लिए एक बेहतरीन यात्रा विकल्प साबित हो सकता है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर