डेली24 भारत डेस्क: हर वर्ष की तरह इस साल भी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय परेड आयोजित हुई और इस बार उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की गौरवशाली संस्कृति प्रदर्शित हुई. झांकी के माध्यम से बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परंपराओं को समर्पित यह प्रस्तुति राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती है. झांकी में प्राचीन कालिंजर दुर्ग की भव्यता और आधुनिक उत्तर प्रदेश की तेजी से विकासशील छवि का संगम जीवंत रूप में नजर आता है.
झांकी के अग्रभाग में कालिंजर दुर्ग की प्रसिद्ध शैल-कला कृतियों में से एक मुख वाले लिंग को स्थापित किया गया है. यह प्रतीक बुंदेलखंड की प्राचीन आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करता है. लिंग की स्थापना यह दर्शाती है कि यह क्षेत्र धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक पहचान का केंद्र है. दर्शक झांकी को देखते हुए बुंदेलखंड की गहरी सांस्कृतिक जड़ों और प्राचीन परंपराओं का अनुभव करते हैं.
झांकी के मध्य भाग में बुंदेलखंड की जीवंत हस्तशिल्प परंपराओं को प्रमुखता दी गई. मृद्भांड कला, मनका शिल्प और स्थानीय व्यापार झांकी में दिखाई देते हैं. ये सभी ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत आते हैं, जो क्षेत्रीय उत्पादों और कारीगरों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का माध्यम है. मध्य भाग में रंग-बिरंगे बर्तन, मनके से बने आभूषण और पारंपरिक वस्त्र झांकी को और आकर्षक बनाते हैं. इस भाग में बुंदेलखंड के स्थानीय कारीगरों की मेहनत और उनकी कला की विविधता स्पष्ट रूप से नजर आती है.
झांकी के पिछले भाग में कालिंजर दुर्ग के नक्काशीदार स्तंभ और भव्य द्वार दर्शकों का ध्यान आकर्षित करते हैं. द्वारों और स्तंभों की भव्यता कालिंजर की स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक गौरव को उजागर करती है. इसके साथ ही नीलकंठ महादेव मंदिर की भव्य झलक दर्शकों को बुंदेलखंड की आध्यात्मिक विरासत की ओर खीचती है. मंदिर की वास्तुकला और कलात्मक नक्काशी यह दर्शाती है की बुंदेलखंड न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध है.
झांकी में बुंदेली कलाकार पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत करते हैं. इनके नृत्य और संगीत बुंदेलखंड के लोकजीवन, उत्सवधर्मिता और सांस्कृतिक रंगों को जीवंत बनाते हैं. कलाकारों के साथ रंग-बिरंगे परिधान और पारंपरिक संगीत झांकी को एक सजीव अनुभव में बदल देते हैं. यह प्रस्तुति बुंदेलखंड की जीवनशैली, लोक परंपराओं और त्योहारों के उत्साह को राष्ट्रीय परेड में प्रदर्शित करती है.
इस झांकी के माध्यम से बुंदेलखंड की संस्कृति, इतिहास और कला को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलती है. यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और कलाकारों की कला को भी सशक्त बनाती है. झांकी देखने वाले हर दर्शक को बुंदेलखंड की ऐतिहासिक गरिमा और सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव होता है. यह प्रस्तुति यह संदेश देती है कि बुंदेलखंड केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आधुनिक दृष्टि से भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और अपनी पहचान को मजबूती से राष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर रहा है.
उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की संस्कृति, कला, धर्म और इतिहास का समृद्ध मिश्रण प्रदर्शित होता है. यह झांकी बुंदेलखंड को एक प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करती है और राष्ट्रीय परेड में राज्य की गौरवशाली छवि को जीवंत रूप से पेश करती है. दर्शक इस झांकी को देखकर न केवल इतिहास और कला का आनंद लेते हैं, बल्कि बुंदेलखंड की जीवंत संस्कृति और पारंपरिक मूल्य भी महसूस करते हैं.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर