डेली24 भारत डेस्क: पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. सवाल यही है कि क्या वाकई दोनों देशों के बीच जंग होने वाली है, या फिर यह दबाव बनाने और रणनीतिक चेतावनियों का दौर है? हालिया घटनाक्रम को देखें तो हालात बेहद नाजुक दिखाई दे रहे हैं और किसी भी छोटी चिंगारी से बड़ा टकराव हो सकता है.
तनाव की शुरुआत हाल के उन संकेतों से होती है, जिनमें अमेरिका और ब्रिटेन ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है. वहीं ईरान ने भी एहतियातन अपने एयरस्पेस को कमर्शल फ्लाइट्स के लिए बंद कर दिया है. आमतौर पर ऐसे कदम तभी उठाए जाते हैं, जब किसी बड़े खतरे की आशंका हो. इससे यह साफ हो गया है कि दोनों पक्ष हालात को लेकर सतर्क हैं और किसी भी संभावित सैन्य टकराव के लिए तैयारियों पर विचार हो रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान के खिलाफ कड़े बयान दे रहे हैं और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दे चुके हैं. उनका रुख साफ है कि अमेरिका अपने हितों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप किसी लंबी और थकाऊ जंग के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने अपने सुरक्षा सलाहकारों से ऐसे विकल्पों पर विचार करने को कहा है, जिनसे ईरान पर निर्णायक दबाव बनाया जा सके, लेकिन महीनों तक चलने वाले युद्ध से बचा जाए. इसी वजह से यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका किसी बड़े लेकिन सीमित सैन्य हमले की रणनीति पर काम कर सकता है. ऐसा हमला अचानक और टारगेटेड हो सकता है, जिससे ईरान को कड़ा संदेश दिया जाए.
अमेरिका यह भी नहीं चाहता कि उसे ईरान के खिलाफ किसी जमीनी संघर्ष में उतरना पड़े. लेकिन समस्या यह है कि अमेरिकी सलाहकार भी इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि सिर्फ एक या दो हमलों से ईरान कमजोर पड़ जाएगा. दूसरी ओर, ईरान साफ कर चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ तो जवाब भी उतना ही जोरदार होगा. ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ऐसी किसी भी स्थिति में जो आग भड़केगी, वह सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरा पश्चिम एशिया उसकी चपेट में आ सकता है. ईरान के पास इस क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के कई विकल्प मौजूद हैं.
अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता यही है कि ईरान उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है. इराक, सीरिया और आसपास के देशों में अमेरिका के कई बेस हैं, जो ईरान के टारगेट पर आ सकते हैं. इसके अलावा इस क्षेत्र में अमेरिका के पास सीमित सैन्य संसाधन होने की बात भी सामने आ रही है, जिससे किसी बड़े संघर्ष की स्थिति में हालात और जटिल हो सकते हैं. यही वजह है कि वॉशिंगटन फिलहाल छोटे और नियंत्रित हमलों की रणनीति पर विचार कर रहा है. इस बीच भारत ने भी हालात की गंभीरता को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. ईरान में रह रहे करीब 10 हजार भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है. तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी इस चेतावनी से साफ है की भारत भी मौजूदा हालात को लेकर चिंतित है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है.
हालात को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि इजरायल भी खुलकर इस संघर्ष में कूदने के संकेत दे रहा है. ईरान पहले ही कह चुका है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो जवाब में इजरायल को भी निशाना बनाया जाएगा. इससे यह टकराव एक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके असर पूरी दुनिया पर पड़ेंगे. कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है. अभी यह कहना मुश्किल है कि जंग होगी या नहीं, लेकिन हालात ऐसे जरूर बन चुके हैं जहां एक गलत कदम पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की आग में झोंक सकता है. दुनिया की नजरें अब इसी पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीति काम करती है या फिर हथियारों की भाषा बोली जाएगी.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर